तो क्‍या पूरा होगा ट्रंप का मकसद-अमेरिका को वेनेजुएला देगा 30 से 50 मिलियन बैरल तेल, जानिए भारत का क्‍या है स्‍टैंड?

January 7, 2026 2:57 PM
Venezuela America oil deal

लेंस डेस्‍क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऐलान किया कि वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल उपलब्ध कराएगा। वर्तमान बाजार भाव के हिसाब से इसकी कीमत करीब 2.8 अरब डॉलर तक हो सकती है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं, लेकिन वैश्विक उत्पादन में उसका हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है। ट्रंप ने कहा कि इस बिक्री से मिलने वाली रकम दोनों देशों के नागरिकों के फायदे के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

व्हाइट हाउस शुक्रवार को अमेरिकी तेल कंपनियों एक्सॉन, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स के प्रमुखों से मिलने वाला है, ताकि वेनेजुएला के विशाल लेकिन जर्जर तेल क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा हो सके।

अमेरिका रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल और इससे जुड़े उत्पादों की खपत करता है, लिहाजा यह आपूर्ति अमेरिकी मांग के सिर्फ ढाई दिन की जरूरत के बराबर होगी। दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडारों के बावजूद वेनेजुएला रोजाना सिर्फ एक मिलियन बैरल के आसपास उत्पादन कर पाता है, जबकि अमेरिका का अक्टूबर में औसत उत्पादन 13.9 मिलियन बैरल रोजाना था।

भारत ने क्‍या कहा ?

भारत ने स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला के साथ उसके लंबे समय से मजबूत और मैत्रीपूर्ण रिश्ते रहे हैं, इसलिए वह चाहता है कि वहां की स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस संबंध में भारत का पक्ष रखा है। यह बयान तब सामने आया जब वे लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा पर थे।

लक्जमबर्ग में एक सवाल के जवाब में, जब उनसे वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को लेकर भारत की स्थिति पूछी गई, तो जयशंकर ने कहा कि भारत ने अपनी नीति पहले ही सार्वजनिक रूप से बता दी है और इसके लिए एक दिन पहले जारी आधिकारिक बयान को देखा जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले से भारत चिंतित है और दोनों देशों अमेरिका और वेनेजुएला से अपील करता है कि वे बातचीत की मेज पर आएं और आपसी सहमति से कोई हल निकालें। उनका मानना है कि अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो यह वहां के नागरिकों के लिए भी फायदेमंद होगा।

वेनेजुएला के साथ द्विपक्षीय संबंधों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने जोर दिया कि भारत चाहता है कि वेनेजुएला फिर से स्थिर और समृद्ध बने, जैसा पहले था, ताकि दोनों देशों के बीच पुराने गहरे संबंध और मजबूत हो सकें। वे उम्मीद जताते हैं कि वेनेजुएला के लोग मौजूदा संकट से शीघ्र बाहर निकल आएं।

चीन पर क्‍या फर्क पड़ेगा?

वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में चीन लंबे समय से सबसे बड़ा खरीदार रहा है, लेकिन 3 जनवरी को अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी के बाद इस सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह कार्रवाई न केवल वेनेजुएला के तेल निर्यात की दिशा बदल सकती है, बल्कि चीन को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करने पर मजबूर कर सकती है।

हालांकि, चीन के कुल तेल आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी मात्र 2% होने से बड़ा झटका नहीं लगेगा, लेकिन 19 अरब डॉलर के बकाया कर्ज और भारी क्रूड की सस्ती आपूर्ति पर असर जरूर पड़ेगा।

नवंबर 2025 में वेनेजुएला के कुल 921,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) तेल निर्यात में से करीब 80% (746,000 बीपीडी) चीन गया था। लेकिन अब ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल भेजेगा, जिससे तेल कीमतें गिर गईं। ब्रेंट क्रूड 60 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 58 डॉलर से नीचे पहुंच गया।

वहीं, चीन के ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों को नुकसान होगा, जो सस्ते वेनेजुएलियन क्रूड पर निर्भर हैं, सैंक्शंस हटने से कीमतें बाजार दर पर पहुंचेंगी और आपूर्ति घट सकती है।

चीन ने हमले की कड़ी निंदा की और मदुरो की रिहाई की मांग की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि वेनेजुएला के साथ सहयोग जारी रहेगा और चीनी कंपनियों के हितों की रक्षा की जाएगी। चीन ने पिछले दो दशकों में 4.8 अरब डॉलर का निवेश किया है, मुख्य रूप से ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में और 2007 से 62.5 अरब डॉलर के लोन दिए हैं।

ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट के अनुसार यह अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव का संकेत है, जो नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को दरकिनार कर आर्थिक हितों पर फोकस करता है।

अल जजीरा के विश्लेषण में कहा गया कि वेनेजुएला के तेल उत्पादन को बहाल करने में दशकों लगेंगे, क्योंकि उत्पादन 1990 के स्तर से एक तिहाई रह गया है। रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देशों को भी आर्थिक असर पड़ेगा, लेकिन अमेरिका वेनेजुएला को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाकर चीन और रूस की चुनौती को कम करना चाहता है।

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