सरोकार
जब महिमा को धर्म के आगे झुकना पड़ता है: संस्थागत स्वरूप, वास्तविक न्याय और निर्णायक आह्वान
रामचरितमानस की शास्त्रीय कल्पना में दो दोहे ऐसे हैं, जो सत्ता, वैधता....
बाज़ारों में बहार है, पर ग्राहक लाचार है!
बाजार (Market) में चमक-दमक है, मगर आम आदमी के चेहरे पर धमक....
जब महात्मा गांधी ने 125 वर्ष तक जीने की इच्छा त्याग दी थी!
इस समय जब पूरी दुनिया महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की ओर उम्मीद....
बीज और वृक्ष: चुनाव आयोग, हारने वाले की सहमति और भारत के अगले गणराज्य का निर्माण
I. सितंबर के तीन दिनइस सितंबर में तीन दिनों के भीतर भारतीय....
साम्राज्यवादी नाकेबंदी से जुझते क्यूबा के प्रतिरोध को सलाम, क्यूबा को दूसरा गाजा बनाने की अमरीकी नीति का पुरजोर प्रतिरोध जरूरी
यह मेरे जीवन की एक अनमोल और अविस्मरणीय परिघटना बन गई जब....
समाज को ‘ख़ून का प्यासा’ बनाने की क़ीमत कौन चुकाएगा?
20 जुलाई 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने बुलडोज़र....
दिल्ली दंगे मामले में न्याय की धूमिल उम्मीदें
27 फरवरी 2020 को भागीरथ विहार के बड़े नाले से मुशर्रफ की....
जर्मनी के चुनाव में धुर दक्षिणपंथी नव नाजी पार्टी AFD की जीत ने दुनिया भर में नव फासीवाद के बढ़ते खतरे को फिर से उजागर किया
-तुहिन देब, वामपंथी कार्यकर्ता हाल ही में जर्मनी के पूर्वांचल के सेक्सोनी....
सत्य निकेतन: एक शहर जिसे सुरक्षित बनाया ही नहीं गया
6 सितंबर 2026 की दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास....
गणराज्य की दूसरी बही: शेल पार्टियां, चुनिंदा कार्रवाई और अनकहे पैसे का हिसाब
एक कालक्रम और उससे उठने वाले सवाल भारत के सार्वजनिक रिकॉर्ड में....















