धर्मेंद्र प्रधान : मोदी सरकार का दागदार चेहरा !

नई दिल्ली। 2014 से लेकर 2026 तक विगत 12 वर्षों में केंद्र सरकार के कई बड़े और नीतिगत मंत्रालयों की कमान संभालने वाले केंद्रीय मंत्री (Dharmendra Pradhan) भारतीय राजनीति के एक शक्तिशाली चेहरे के रूप में उभरे हैं लेकिन नीतिगत सुधारों के दावों के साथ-साथ उनके कार्यकाल पर गंभीर घोटालों, अनियमितताओं और विवादों के साए भी लगातार मंडराते रहे हैं। आइए जानते हैं पिछले 12 सालों की पूरी इनसाइड स्टोरी।



पेट्रोनेट एलएनजी (Petronet LNG) और गैस अनुबंध विवाद

“पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल के दौरान ‘पेट्रोनेट एलएनजी’ (Petronet LNG) में कथित धांधली का मामला संसद तक में गूंजा था।

  • ​गैस खरीद समझौतों और प्रबंधन पर सवाल: पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस खरीद के समझौतों में अनियमितताओं और प्रक्रियात्मक चूक के आरोप लगे।
  • मार्च 2020 में लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में स्वयं मंत्रालय ने यह स्वीकार किया था कि पेट्रोनेट एलएनजी के तत्कालीन प्रबंधन और अधिकारियों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिन्हें कंपनी की ऑडिट कमेटी के पास समीक्षा के लिए भेजा गया था।
  • विपक्ष ने आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी एलएनजी आयातक कंपनी बोर्ड-मैनेज्ड (Board-managed) होने की आड़ में पारदर्शी निगरानी से बचती रही और सार्वजनिक संपत्ति के आवंटन में कथित तौर पर गड़बड़ी की गई।

    इन पर बेटी के विदेश सिमकार्ड के लिए सरकारी पैसे से 60 हजार रुपयों के भुगतान के भी आरोप लगे।

    ​’उज्ज्वला’ में कागजी फर्जीवाड़ा और ईंधन की दरें

    ​ “2014 से 2021 तक पेट्रोलियम मंत्रालय संभालने के दौरान ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ को सरकार ने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने इसमें कई गंभीर सवाल खड़े किए।
  • कैग रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी आधार नंबरों, वाणिज्यिक उपयोग के लिए सब्सिडी वाले सिलेंडरों के डायवर्जन और एक ही दिन में एक ही कनेक्शन पर अत्यधिक रीफिलिंग जैसी गड़बड़ियां पाई गईं।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की दरें रिकॉर्ड निचले स्तर पर होने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल पर भारी उत्पाद शुल्क लगाया गया, जिसे विपक्ष ने जनता का ‘आर्थिक शोषण’ और ‘नीतिगत भ्रष्टाचार’ करार दिया।

    व्यापम मामले से जुड़े आरोप (2015-16)

    “धर्मेंद प्रधान का नाम केवल पेट्रोलियम क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। 2015 में मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ‘व्यापमं घोटाले’ (Vyapam Scam) की जांच के दौरान आयकर विभाग की एक पुरानी रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने उन पर गंभीर आरोप लगाए।

    विपक्ष का दावा था कि घोटाले के मुख्य आरोपियों द्वारा उनके हवाई यात्रा के टिकट स्पॉन्सर किए गए थे। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान और बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया था।”

    कौशल विकास मंत्रालय — कागजी आंकड़ेबाजी

    ​”2017 से कौशल विकास मंत्रालय का प्रभार संभालते हुए धर्मेंद्र प्रधान ‘स्किल इंडिया’ अभियान को गति देने के लिए जिम्मेदार थे। हालांकि, जमीन पर इसके परिणाम निराशाजनक रहे। करोड़ों रुपये के बजटीय आवंटन के बावजूद वास्तविक प्लेसमेंट (रोजगार) दरें बेहद कम रहीं और कई राज्यों में फर्जी ट्रेनिंग सेंटरों के जरिए सरकारी फंड के दुरुपयोग के आरोप लगे।”

    शिक्षा मंत्रालय – पेपर लीक और NTA का संकट

    2021 में शिक्षा मंत्री बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के सामने सबसे बड़ा संकट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की साख को लेकर खड़ा हुआ।

    ​”2021 में शिक्षा मंत्री बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के सामने सबसे बड़ा संकट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की साख को लेकर खड़ा हुआ।
  • नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और हालिया परीक्षा सुधारों व टेंडर प्रक्रियाओं में धांधली के गंभीर आरोपों ने देश भर के युवाओं और छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
  • परीक्षा प्रबंधन और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के टेंडर नियमों में कथित रूप से ढील देकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप विपक्ष और छात्र संगठनों द्वारा लगाए गए, जिसके बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज हो गई।”

    “धर्मेंद्र प्रधान और सत्तारूढ़ दल ने हमेशा इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित, निराधार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बताया है। लेकिन चाहे पेट्रोनेट एलएनजी में कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मामला हो, उज्ज्वला के फर्जी आंकड़े हों, या फिर देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक का संकट—विपक्ष और आम जनता लगातार निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग करते रहे हैं।”

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