तिरुअनंतपुरम। क्या युवाओं के किसी लोकतांत्रिक आंदोलन पर कोई गोली चलवाने का आदेश दे सकता है? क्या कोई आंदोलनकारी महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसी बात भी कर सकता है? यह हुआ है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) के एक विचारक ने कहा है कि अगर जंतर मंतर आंदोलनकारियों को संभालने की जिम्मेदारी उन पर होती तो वे उन पर गोलियां चलवा देते। दिल्ली के इनकी टिप्पणी से एक तरफ बवाल खड़ा हो गया दूसरी तरफ आरएसएस ने इस टिप्पणी पर कहा कि यह उनके अपने विचार हैं।
जंतर – मंतर आंदोलन पर गोलियां चलवा देने वाली यह टिप्पणी की है RSS विचारक, लेखक और केरल से जुड़े राजनीतिक टिप्पणीकार टीजी मोहनदास ने।
एक यूट्यूब वीडियो में मोहनदास ने कहा कि अगर आंदोलन को संभालने की जिम्मेदारी उनके पास होती, तो वे सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाने का आदेश दे देते।
मोहनदास का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया।विवाद बढ़ने के बाद केरल सरकार ने मामले की पुलिस जांच के आदेश दे दिए हैं साथ ही टी जी मोहनदास के खिलाफ अपराध भी पंजीबद्ध कर लिया गया ही।
मोहनदास ने क्या कहा?
अपने इस यू ट्यूब इंटरव्यू में मोहनदास कहते सुने जा रहे हैं कि जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे में पहले कर्फ्यू लगाया जाता। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर होने के लिए तीन बार चेतावनी दी जाती और अगर वे इनकार करते, तो गोली मारने का आदेश दे दिया जाता।
उन्होंने कहा, ‘लोग इधर-उधर भागेंगे। कुछ मरेंगे, कुछ बचेंगे, कुछ गंभीर रूप से घायल होंगे। चार घंटे के भीतर स्थिति शांत हो जाएगी। हम शवों को इकट्ठा करेंगे और अस्पताल ले जाएंगे।’
मोहनदास यहीं नहीं रुके। एक दूसरे वीडियो में वे आंदोलन में शामिल महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुने जा रहे हैं।उन्होंने महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म होगा और कोई शिकायत नहीं करेगा।
उन्होंने वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा से जुड़े लोगों को भी निशाना बनाया।
टीजी मोहनदास के इस इंटरव्यू पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई।बवाल मच गया और तब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने खुद को इस बयान से अलग कर लिया।
इस पर विवाद बढ़ने के बाद RSS के दक्षिण केरल सह प्रांत कार्यवाह के बी श्रीकुमार ने एक बयान जारी किया और सफाई दी कि मोहनदास संघ में किसी भी स्तर पर ‘दायित्ववान कार्यकर्ता’ नहीं हैं और उनकी टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। श्रीकुमार ने कहा कि संघ न सिर्फ इन विचारों से असहमत है, बल्कि मानता है कि ऐसे विचारों की हर प्रकार से भर्त्सना की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मोहनदास भाजपा के इंटेलेक्चुअल सेल के राज्य संयोजक रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े भारतीय विचार केंद्र में भी नेतृत्व की भूमिका निभा चुके हैं। टीजी मोहनदास इंजीनियर और वकील भी हैं तथा पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं।
सीपीआई से जुड़े छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने केरल के पुलिस महानिदेशक से मोहनदास के खिलाफ शिकायत की। इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि मोहनदास की टिप्पणियां हिंसा भड़काने वाली हैं और उन पर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने भी केरल के गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक को शिकायत सौंपी, जिसमें मोहनदास के बयान के ऑडियो-वीडियो की वैज्ञानिक जांच और हिंसा भड़काने के आरोप में कार्रवाई की मांग की गई।
युवा संगठन ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई।
इन शिकायतों के बाद केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने पुलिस को मामले की जांच का निर्देश दिया, जिसके बाद मोहनदास के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी मोहनदास पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे संघ परिवार की उन ताकतों की ‘सुनियोजित कोशिश’ कहा, जो प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी नफरत फैलाने में जुटी हैं। बिना नाम लिए विजयन ने तेलंगाना के एक भाजपा सांसद पर भी NEET प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोली चलाने की वकालत करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर संघ और केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने कहा कि मोहनदास का यह बयान महिलाओं और युवाओं के प्रति RSS की हिंसक सोच को दर्शाता है और मांग की कि नफरत फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
उल्लेखनीय है कि जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मोहनदास ने यह टिप्पणी की, वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में हाल में सक्रिय रहे छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी – सीजेपी से जुड़े थे। यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब बिहार और असम सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने और हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा करने का ऐलान किया है , हालांकि बिहार में अभी इन युवाओं पर सरकार सख्ती कर रही है एक मामले में तो एक सिपाही एक स्टूडेंट पर ए के 47 टाने भी नजर आया है।
संघ से जुड़े इस टिप्पणीकार के इस बयान को सीधे हिंसा भड़काने वाला माना जा रहा है।
फिलहाल मामला केरल पुलिस की जांच के दायरे में है और यह देखना बाकी है कि मोहनदास के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।








