राम मंदिर चढ़ावा चोरी : SIT रिपोर्ट और इस्तीफे के बाद क्या बच जाएंगे चंपत राय और अनिल मिश्रा?

अयोध्या से The Lens के लिए अरुण पांडेय की रिपोर्ट

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और गबन मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की थी। ट्रस्ट की मांग पर यह टीम बनी, जिसे प्रारंभिक रिपोर्ट 7 दिनों में और अंतिम रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करने को कहा गया था।

लेकिन यह रिपोर्ट SIT गठन के लगभग 3-4 सप्ताह बाद सार्वजनिक हुई। इसके एक दिन पहले ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय बंसल और कोषाध्यक्ष पद से अनिल मिश्रा इस्तीफा दे चुके थे।

हालांकि रिपोर्ट पर 23 जून 2026 की तारीख दर्ज है और परम गोपनीय लिखा हुआ है। प्रारंभिक जांच पर आधारित इस रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में गंभीर कमियों, CCTV फुटेज में गड़बड़ी और कर्मचारियों द्वारा चोरी के करीब 70 उदाहरणों का जिक्र है। सवाल यह है कि यह रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान के अनुकूल है?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में कहा था कि ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा। SIT रिपोर्ट में कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों जैसे अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, टिन्नू यादव, मनीष कुमार यादव, करूणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा को सीधे चोरी में शामिल बताया गया है। रिपोर्ट में चोरी की घटनाएं स्पष्ट रूप से दर्ज हैं और सिस्टम की कमियों को उजागर किया गया है।

इस्तीफे के बाद कहां हैं चंपत राय?

शरद शर्मा, वीएचपी प्रवक्‍ता

चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद क्या वह अयोध्या में हैं और आगे की उनकी क्या योजना है? यह जानने के लिए सीधे चंपत राय को फोन किया गया, तो कॉल रिसीव नहीं हुई। चंपत राय जाहिर तौर पर अयोध्या के कारसेवकपुरम में ही रहते थे, लेकिन इस वक्त वह कहां हैं? इसका जवाब विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा के पास भी नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल-फिलहाल में उनकी चंपत राय से मुलाकात नहीं हुई है। मौजूदा समय में वह कारसेवकपुरम में भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनकी आगे की कार्ययोजना के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं है।

कितना धुल पाएगा कलंक ?

SIT रिपोर्ट में अनिल मिश्रा का नाम तो है, लेकिन चंपत राय का जिक्र सीधे तौर पर नहीं है। रिपोर्ट में ट्रस्ट पदाधिकारियों के रूप में उल्लेख कई जगह है। रिपोर्ट ट्रस्ट पदाधिकारियों के नेतृत्व में प्रक्रियाओं की कमियों, अनुपालन न होने, शिकायतों की अनदेखी और कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति/जिम्मेदारियों को उनकी सिफारिश पर होने का जिक्र करती है।

चंपत राय ने गणना प्रक्रिया और सुरक्षा की जिम्मेदारी दूसरों को सौंपी, लेकिन पर्यवेक्षण में कमी रही। CCTV, फ्रिस्किंग, सीलिंग जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं का उल्लंघन हुआ। कुछ आरोपी उनकी सिफारिश पर नियुक्त थे।

हालांकि यह पूरा मामला सामने आने के बाद चंपत राय का 40 सेकंड का एक ही बयान अब तक सामने आया है। जिसमें वह कहते हैं कि ऑडिट में कुछ भी उल्लेखनीय नहीं मिला है। इसके बाद से चंपत राय मीडिया के सामने नहीं आए हैं। हालांकि उनका यह बयान कि वह अयोध्या से कलंक लेकर वापस नहीं जाएंगे, यह भी चंपत राय के हवाले से उनके किसी करीबी की ओर से दिया गया और मीडिया की सुर्खियां बना।

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया है और किसी भी आरोप से इनकार किया है। चंपत राय के हवाले से कहा जा रहा है कि चोरी की शिकायत उन्हीं की थी।

चढ़ावा चोरी की घटना को कैसे देखती है SIT रिपोर्ट?

SIT रिपोर्ट राम मंदिर में हुई चोरी की व्यापकता और निरंतरता को सामने लाती है। गणना कक्ष में 70 बार (27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक) नोटों की गड्डियां छिपाई गईं, जेबों/जूतों में रखी गईं। CCTV फुटेज में ओवरराइटिंग, टेम्परिंग के संकेत मिले हैं। नकदी और बहुमूल्य धातुओं जैसे चांदी आदि की चोरी या गबन की बात कही गई है। चेन ऑफ कस्टडी टूटना, अनधिकृत एक्सेस, फ्रिस्किंग न होना। बैंक खातों और बैलेंस में असंगतियां। रिपोर्ट इसे एकल घटना नहीं, बल्कि सिस्टेमेटिक लापरवाही और कुछ कर्मचारियों द्वारा संगठित चोरी मानती है।

क्या रिपोर्ट सभी आरोपों का जवाब देती है?

निचले स्तर के कर्मचारियों की भूमिका, CCTV सबूत, गणना प्रक्रिया की खामियां, बहुमूल्य वस्तुओं जैसे चांदी की ईंटें आदि के प्रबंधन में गड़बड़ियों का खुलासा है लेकिन ट्रस्ट पदाधिकारियों की सीधी संलिप्तता पर स्पष्ट ‘क्लीन चिट’ भी SIT की रिपोर्ट में नहीं है। यह रिपोर्ट प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुरक्षा उपायों की विफलता पर जोर देती है, लेकिन बड़े स्तर पर साजिश का पूरा खुलासा अभी बाकी लगता है।

अदालत की कार्यवाही होगी महत्वपूर्ण

कालिका प्रसाद मिश्रा, अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष

राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी को लेकर SIT की जांच, ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयान के आधार पर तुरंत किसी निर्णय पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने बताते हैं कि अदालत में यह मामला अभी शुरुआती चरण में है। आठों आरोपी अदालत में क्या बयान देते हैं यह देखना महत्वपूर्ण होगा। SIT की रिपोर्ट भी कोर्ट में रखी जाएगी। यह संभव है कि अदालती कार्रवाई के बाद इस मामले में और भी लोगों पर आरोप तय हों और उनकी संलिप्तता की बड़े पैमाने पर जांच की जाए।

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