SIT रिपोर्ट में चंपत और गोपाल का नाम नदारद, टिन्नू को बना दिया मुख्य आरोपी

नई दिल्ली। राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janmabhoomi Temple) के चढ़ावा चोरी मामले में गठित SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय और गोपाल राव का नाम नदारद है जिसको लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

गंभीर खामियों का खुलासा

जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों और लापरवाहियों का खुलासा हुआ है। जांच में बताया गया है कि चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया पर निगरानी के लिए बनाए गए नियमों को ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कमजोर किया। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने मंदिर के चढ़ावे में चोरी की। अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।

ये खामियां बनी चोरी का कारण

  • गणना कक्ष में प्रवेश के नियमों का पालन नहीं हुआ।
  • कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली गई।
  • निर्धारित वेशभूषा लागू नहीं की गई।
  • निजी सामान पर नियंत्रण नहीं रखा गया।
  • दान पेटियों की अलग-अलग गणना और रिकॉर्डिंग ठीक से नहीं हुई।
  • प्रभावी निगरानी नहीं की गई।
  • ट्रस्ट और बैंक के प्रतिनिधि मौजूद होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं कराई गई।
  • CCTV कैमरे लगे थे, लेकिन उनकी लाइव निगरानी नहीं की गई। यदि फुटेज पर नजर रखी जाती तो चोरी रोकी जा सकती थी।
    सख्त नियमों को ट्रस्टियों किया गया कमजोर

SIT रिपोर्ट के अनुसार 6 फरवरी 2025 को चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP बनाया गया था। इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में कौन जाएगा, कर्मचारियों की एंट्री कैसे होगी, वे किस तरह की वेशभूषा पहनेंगे और गिनती शुरू होने से पहले तथा खत्म होने के बाद उनकी तलाशी भी ली जाएगी लेकिन बाद में इन नियमों को कमजोर कर दिया गया।

रिपोर्ट में सवाल खड़े किए गए है कि यह जांच का विषय है कि किन परिस्थितियों व कारणों में सुरक्षा नियमों में बदलाव किया गया। इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर आरोपी चढ़ावे की रकम चोरी करने में सफल हुए।

अनिल मिश्रा की लापरवाही पर सवाल

एसआईटी रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। SIT के मुताबिक 20 सितंबर 2024 को उन्हें दान और चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी जिम्मेदारी थी कि गणना प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी करें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्ट में उन्हें निगरानी में लापरवाही का दोषी माना गया है।

टिन्नू यादव को बनाया गया मुख्य आरोपी

SIT रिपोर्ट के अनुसार राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव चोरी का मुख्य आरोपी है। वह मंदिर परिसर में रखी विभिन्न दान पेटियों की चाबियां ट्रस्ट प्रतिनिधि के रूप में अपने पास ही रखता था। हालांकि इसके लिए उसे कोई औपचारिक अधिकार ट्रस्ट की ओर से नहीं दिए गए थे। SIT रिपोर्ट के अनुसार टिन्नू यादव ने अपने भतीजे मनीष यादव को ट्रस्ट में नौकरी दिलाई और उसकी ड्यूटी चढ़ावे की गणना में लगवाई थी। इसके बाद दोनों ने मिलकर चढ़ावे की रकम की चोरी की।

चंदे के गणना प्रभारी पर भी कार्रवाई

रिपोर्ट में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की जिम्मेदारी भी तय की गई है। जांच में कहा गया है कि उनकी मौजूदगी में ही चढ़ावे की रकम चोरी हुई। इसलिए उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।

45 दिन की CCTV फुटेज में 70 बार चोरी


SIT रिपोर्ट के अनुसार CCTV फुटेज केवल 27 अप्रैल 2026 से अगले 45 दिनों तक की थी। इसी फुटेज में आरोपी करीब 70 बार नोटों की गड्डियां चोरी करते हुए देखे गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे पहले के फुटेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए यह पता नहीं चल सका कि चोरी कब से चल रही थी और कुल कितनी रकम का गबन हुआ। इसी कारण वास्तविक चोरी की रकम का आकलन भी नहीं हो सकता।

45 दिन में नष्ट कर दी जाती थी सीसीटीवी फुटेज

SIT ने यह भी कहा कि मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर केवल 45 दिन की CCTV फुटेज सुरक्षित रखना उचित नहीं था। पहले ही 180 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। इससे पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सके और जांच प्रभावित हुई।

बैंक की भूमिका पर सवाल

रिपोर्ट में बैंक की जिम्मेदारी भी तय की गई है। कहा गया है कि गणनाकर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई। बैंक के प्रतिनिधि गणना के दौरान मौजूद रहते थे, लेकिन उन्होंने भी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया। इसके अलावा अधिकारियों का नियमित रोटेशन भी नहीं किया गया।

बहरहाल SIT ने साफ किया है कि यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियों, पर्यवेक्षण की विफलताओं और सुधारात्मक सुझावों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इसलिए मामले में आगे और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चोरी इसलिए संभव हुई, क्योंकि सुरक्षा से जुड़े कई नियमों का पालन ही नहीं किया गया।

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