नई दिल्ली। नई दिल्ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी कि CPI(M) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने जेएनयू की पूर्व अध्यक्ष और SFI नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश में पार्टी मुख्यालय AKG भवन में जबरन प्रवेश करने का प्रयास किया। पार्टी ने इस कार्रवाई को गैर-कानूनी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
CPI(M) के अनुसार, घटना के दौरान राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने हस्तक्षेप कर पुलिस को पार्टी मुख्यालय के अंदर प्रवेश करने और कार्रवाई करने से रोका। पार्टी का दावा है कि पुलिस एक निजी वाहन में पहुंची थी और वहां मौजूद कुछ लोग वर्दी में नहीं थे। जब उनसे पूछताछ की गई तो वे वहां से चले गए।
CPI(M) ने बयान जारी कर कहा कि किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह प्रवेश करने की कोशिश लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। पार्टी का आरोप है कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर केंद्र सरकार असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी ने कहा कि सरकार छात्रों की मांगों और चिंताओं का समाधान करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर उन्हें डराने, चुप कराने और विरोध को अपराध की तरह पेश करने का प्रयास कर रही है।
केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसने स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की नेता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की केंद्रीय समिति के कार्यालय में जबरन घुसने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए श्री विजयन ने कहा कि दिल्ली पुलिस, जो केंद्र सरकार के राजनीतिक हितों के अनुसार काम करती है, का यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर गंभीर हमला है।
पूर्व सीएम ने आगे लिखा, एक पुराने अदालती मामले के नाम पर पार्टी कार्यालय में घुसकर आइशी घोष को गिरफ्तार करने का प्रयास कानून के शासन के लिए चुनौती है। इसे केवल जंतर मंतर प्रदर्शनों के दौरान केंद्र सरकार और संघ परिवार को हुई शर्मिंदगी के राजनीतिक बदले के रूप में ही देखा जा सकता है। यह व्यर्थ आशा है कि झूठे आरोपों या उन लोगों को धमकाने से देश में छात्र आंदोलन की ताकत को कम किया जा सकता है जो सवाल पूछते हैं या विरोध व्यक्त करते हैं।
विजयन ने लिखा कि राज्य शक्ति के ऐसे खुले दुरुपयोग से भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की असहमति के प्रति बढ़ती असहिष्णुता झलकती है। यह वह क्षण है जब लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को आवाज उठानी चाहिए। असहमति को डराने और आपराधिक बनाने के प्रयासों का विरोध किया जाना चाहिए, और विरोध करने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
CPI(M) राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि पुलिस एक प्राइवेट गाड़ी में आई थी। कुछ लोग बिना यूनिफाॅर्म के थे और सवाल पूछे जाने पर वे चले गए।
उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक पार्टी के दफ्तर में इस तरह की बेबाक घुसपैठ और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई, लोकतांत्रिक अधिकारों पर सरकार के बढ़ते हमले को उजागर करती है।








