रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार के 5 नए मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मान्यता देने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद सरकार ने इन कॉलेजों में डीन और अस्पताल अधीक्षक की स्थायी नियुक्तियां कर दी हैं। यह मामला अब विवादों में घिर गया है।
NMC ने क्यों रद्द की मान्यता?
NMC के नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 220 बेड वाला अस्पताल और तैयार कॉलेज भवन अनिवार्य है लेकिन छत्तीसगढ़ में कुनकुरी, मनेन्द्रगढ़, कवर्धा, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा के प्रस्तावित कॉलेजों में ये बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। कई जगहों पर सिर्फ 50 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) को 220 बेड का अस्पताल बताकर प्रस्ताव भेजा गया था। NMC ने जून 2026 में सभी 5 प्रस्ताव खारिज कर दिए।
फिर भी सरकार ने की नियुक्तियां
NMC के खारिज करने के महज 12-14 दिन बाद, 24 जून 2026 को सरकार ने इन 5 कॉलेजों में पूर्णकालिक डीन और अस्पताल अधीक्षक की स्थायी नियुक्ति कर दी। नियुक्त डॉक्टरों में डॉ. रंजना सिंह आर्या, डॉ. एस.पी. कुजूर, डॉ. अजय कोसम, डॉ. राकेश नहरेल और डॉ. टीकू सिन्हा शामिल हैं।
बजट और हकीकत
सरकार ने इन 5 कॉलेजों के लिए कुल 1645 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
कुनकुरी – 359 करोड़
मनेन्द्रगढ़ – 323 करोड़
दंतेवाड़ा – 326 करोड़ आदि
लेकिन जमीनी हकीकत अलग है – भवन अधूरे हैं, प्रमाण पत्र नहीं बने हैं और स्टाफ की भारी कमी है।
प्रदेश की वर्तमान स्थिति
राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज में ही 40% पद खाली हैं। पूरे प्रदेश के 10 मेडिकल कॉलेजों में 51% पद रिक्त हैं। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने इसे “चिकित्सा शिक्षा विभाग की आपराधिक लापरवाही” बताया। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रेशम सिंह ने मांग की है कि पहले NMC के सभी मानक पूरे किए जाएं।
अब सवाल ये हैं मान्यता रद्द होने के बाद नियुक्तियां क्यों की गईं? 50 बेड के CHC को 220 बेड का अस्पताल बताना सही है? 1645 करोड़ रुपये खर्च के बावजूद बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं बनीं? सरकार का कहना है कि वह दोबारा प्रस्ताव भेजेगी, लेकिन 2026-27 सत्र में इन 5 कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने की संभावना लगभग शून्य बताई जा रही है।











