भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन निर्णायक दौर में पहुंच गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान सात दिन का राशन-पानी साथ लेकर Bhopal पहुंच गए। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
भोपाल पहुंचने के दौरान कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि, प्रदर्शनकारी बैरिकेड हटाकर शहर में प्रवेश करने में सफल रहे और मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर गए। आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन सरकारी एजेंसियां कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीद रही हैं।
शेष फसल किसानों को खुले बाजार में 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचनी पड़ रही है, जिससे प्रति क्विंटल 2 से 3 हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
किसानों का कहना है कि जब सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित किया है तो पूरी उपज उसी दर पर खरीदी जानी चाहिए।
सड़क पर बनाई बाटी, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने अपने साथ कई दिनों का राशन भी लाया है। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कई किसानों ने सड़क किनारे ही खाना बनाना शुरू कर दिया।
एक किसान ने कहा कि ‘हम अपने साथ राशन लेकर आए हैं। पुलिस ने रोक दिया तो सड़क पर ही बाटी बना रहे हैं। कोई किसान भूखा नहीं रहेगा। अभी तो केवल 10 प्रतिशत किसान आए हैं, बाकी बुधवार को भोपाल पहुंचेंगे। सरकार हमारी मांगें मान ले तो हम वापस लौट जाएंगे।’
19 किसान संगठनों का आंदोलन, क्या है पूरा विवाद?
प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। किसान संगठनों का आरोप है कि खरीदी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और अधिकांश किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ रही है।
राज्य सरकार ने केंद्र से भावांतर योजना लागू करने का अनुरोध किया था, ताकि बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच का अंतर किसानों को दिया जा सके, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्रालय से इसे मंजूरी नहीं मिली। राज्य सरकार की उम्मीद केंद्र से मिलने वाले 75 हजार करोड़ रुपये के बकाया पैकेज पर भी टिकी हुई है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। किसान क्रांति पैदल यात्रा बरखेड़ा से शुरू होकर औबेदुल्लागंज, मंडीदीप और 11 मील बायपास होते हुए भोपाल पहुंची। 11 मील बायपास पर पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाई, लेकिन किसान उन्हें हटाकर आगे बढ़ गए।
जीतू पटवारी ने सरकार से की बातचीत की मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किसानों के समर्थन में मुख्यमंत्री मोहन यादव से तत्काल बातचीत करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसानों पर बल प्रयोग किया गया तो सरकार को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार को किसानों की मांगों पर तुरंत फैसला लेना चाहिए।
किसानों ने मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी करने, खाद वितरण व्यवस्था सुधारने, किसानों से जुड़े लंबित फैसलों पर जल्द निर्णय लेने, एमएसपी पर खरीदी की प्रभावी व्यवस्था लगने की मांग रखी है।
फिलहाल आंदोलन जारी है और किसान मुख्यमंत्री आवास के बाहर डटे रहने की तैयारी में हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार किसानों से बातचीत कर कोई समाधान निकालती है या आंदोलन और तेज होता है।








