उत्तर से दक्षिण तक मंदिरों में हो रहे महाघोटाले

नई दिल्ली। एस लक्ष्मीनारायण भारत सरकार में पूर्व गृह सचिव हैं बेहद धार्मिक, मेहनती और कर्तव्यपरायण। केरल के रहने वाले लक्ष्मीनारायण ने अपनी माँ की स्मृति में 2024 के दौरान तक़रीबन एक किलो सोने से बनी एक रामचरिमानस अयोध्या स्थित राम मंदिर में भेंट की थी। कुछ दिनों तक वो दिखी फिर अचानक गायब हो गई।

उन्होंने इसके बारे में राममंदिर के ट्रस्टी चंपत यादव से पूछा तो उन्होंने बदतमीजी से कहा कि बहुत चढ़ावा आता है यहाँ, हमें ध्यान नहीं आपकी मानस कहाँ गई। जब उन्होंने निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र से पुछा तो उन्होंने कहा कि सब चंपत राय ही देख रहे हैं। मैं सिर्फ़ उनसे कह सकता हूँ। बेहद दुखी पूर्व गृह सचिव ने जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष सलाहकार अवनीश अवस्थी से कहा तो उन्होंने कहा कि दान दिया तो भूल जाइए। ऐसी सैकड़ों सच्ची कथायें देश भर से सामने आ रही हैं। दरअसल राम मंदिर ट्रस्ट में हुई चंदा चोरी महज एक आपराधिक घटना नहीं है।

ऐसी घटनायें बार बार घट रही हैं। हर दिशा में घट रही हैं। अयोध्या की चर्चा इसलिए ज़्यादा हो रही है क्योंकि राम मंदिर आधुनिक भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा द्वारा हिंदू चेतना का प्रतीक बताया जाता है। एक ऐसे वक्त में जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए घोटालों की रोज नई फ़ेहरिस्त सामने आ रही है, बद्रीनाथ और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट में भी कथित घोटालों को लेकर आवाज उठने लगी है।

बद्रीनाथ ट्रस्ट ने तो जांच के भी आदेश दे दिए है लेकिन कई मंदिर ऐसे हैं जहाँ पर होने वाले घोटालों को लेकर मंदिर प्रबंधन ख़ामोश है, सरकार भी खामोश है और मीडिया भी।

किसी भी घोटाले की जांच नहीं हुई पूरी

राम मंदिर ट्रस्ट में हुए घोटाले पर फिलहाल भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और आरएसएस खामोश हैं। मोहन भागवत ने भी घोटालों से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने से साफ़ इनकार कर दिया है लेकिन सवाल खड़ा होता है कि क्या चुप्पी से इस लूट से जुड़े गुनहगारों को सजा मिल जाएगी? हमने विगत एक दशक में देश के अलग अलग मंदिरों में हुए बड़े घोटालों को लेकर पड़ताल शुरू की तो यह जानकारी मिली कि घोटालों से जुड़े किसी भी मामले में आज तक किसी को सजा नहीं मिली है। शिकायतें दर्ज कराई गई और जांच जरूर शुरू हुई है।

राज्य नियंत्रण वाले मंदिरों में फंड के दुरुपयोग के आरोप नियमित तौर पर लगते रहते हैं। कई बड़े मंदिरों के ट्रस्ट सरकारी नियंत्रण में हैं, जहां खरीदी, जमीन और दान प्रबंधन में अनियमितताएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं। अफ़सोस कोई भी जाँच प्रक्रिया अंजाम तक नहीं पहुँची है। आइए इन घोटालों की फेहरिस्त पर नजर डालते हैं।

श्री राम जन्मभूमि, अयोध्या उत्तर प्रदेश

  1. श्री राम जनमभूमि मंदिर, अयोध्या में घोटालों की सुगबुगाहट 2024 में ही सुनाई देने लगी थी लेकिन जून 2026 में ख़बरों के प्रकाशन के बाद पूरे घोटाले पर से पर्दा हट गया। यहाँ पर मुख्य रूप से दान की चोरी, कैश, जेवर, सोना-चांदी की चोरी के दावे। यह कुल कितने करोड़ का घोटाला है अभी तक स्पष्ट नहीं है।

    यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घोटाले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया लेकिन केंद्र सरकार जिसके अधीन यह ट्रस्ट था वह अब तक खामोशी ओढ़े बैठी हैं। रोज़ कोई ना कोई सामने आता है और कहता है कि हमने जो दान किया था वह नदारद है। एक सिंधी संगठन ने दावा किया है कि लगभग 4.8 करोड़ रुपये की चाँदी की ईट दान की, लेकिन रसीद नहीं मिली। यूपी सरकार द्वारा गठित SIT की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया, ज्यादातर कर्मचारी छोटे लेवल पर काम करते थे।

    ट्रस्ट के दो सदस्यों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया लेकिन इनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज नहीं किया गया। अयोध्या में एक बड़ा घोटाला ट्रस्ट द्वारा ज़मीन की ख़रीद फरोख्त में किया गया। आसपास की जमीन डील्स में भी राजनीतिक व्यक्तियों और अधिकारियों के जुड़ाव के गंभीर आरोप लगते हैं। यहाँ पर वीआईपी पास के नाम पर भी घोटाला हुआ जिसकी तो अभी जांच भी शुरू नहीं हुई है।
  2. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम, आंध्र प्रदेश

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में दुशाला खरीदी में 54 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया गया । 2015-2025 तक ठेकेदार ने प्योर मलबेरी सिल्क दुपट्टों की जगह 100फीसदी % पॉलिएस्टर सप्लाई किए, लेकिन सिल्क के रेट पर बिलिंग की गई जिसकी लैब टेस्ट से पुष्टि हुई। 2025 में विजिलेंस जांच से इस घोटाले का खुलासा हुआ बाद में जाँच एंटीकरंप्शन ब्यूरो को सौंप दी गई। यहीं पर स्टाफ द्वारा दान पेटियों से पैसे चोरी के वीडियो भी वायरल हुए ।

पिछले शासनकाल में 100 करोड़ से ज्यादा की चोरी के आरोप लगे। इसके अलवा ट्रस्ट के लोगों पर विदेशी मुद्रा चोरी और बेनामी प्रॉपर्टी के आरोप भी लगाए गए जिसके बाद हाईकोर्ट ने यहां के घोटालों की सीआईडी जांच के आदेश दे दिए। 2024 में वेंकटेश्वर मंदिर के प्रसाद (लड्डू) में इस्तेमाल होने वाले घी में बड़े पैमाने पर मिलावट का मामला सामने आया । यह विवाद तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रसाद के घी में पशुओं की चर्बी और मछली के तेल की मिलावट की गई थी।

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की शुरुआती लैब रिपोर्ट में घी के नमूनों में मिलावट की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद देश भर में श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचने पर भारी आक्रोश फैल गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) और सीबीआई की निगरानी में जांच शुरू की गई। जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह लगभग ₹250 करोड़ का एक सुनियोजित घोटाला था। इसमें आपूर्तिकर्ताओं और कुछ अधिकारियों के सिंडिकेट ने लैब टेस्ट को धोखा देने के लिए शुद्ध घी की जगह पाम ऑयल, रिफाइंड तेल और कृत्रिम रसायनों का इस्तेमाल किया था।

3. श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा

​साल 2018 में पुरी के जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ के आंतरिक कक्ष की चाबियां खोने की बात सामने आई थी। इसको लेकर विपक्ष और श्रद्धालुओं ने खजाने से कीमती गहने गायब होने या चोरी की आशंका जताते हुए भारी हंगामा किया था, जिसके बाद न्यायिक जांच बैठाई गई थी।जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार की चाबी खोने के मामले में जस्टिस रघुवीर दास आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट नवंबर 2018 में ही ओडिशा सरकार को सौंप दी थी लेकिन रिपोर्ट के निष्कर्षों को लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया गया।

आयोग की जांच के बावजूद असली चाबियों के गायब होने का रहस्य पूरी तरह नहीं सुलझ सका। हालांकि बाद में एक ‘डुप्लीकेट चाबी’ मिलने का दावा किया गया था, जिसे लेकर जांच समिति के सदस्यों ने चोरी या आपराधिक मंशा की आशंका भी जताई थी।

इसी वर्ष फरवरी माह में उड़ीसा उच्च न्यायालय ने सरकार को सख्त निर्देश दिए कि जस्टिस रघुवीर दास आयोग की इस जांच रिपोर्ट को विधानसभा के बजट सत्र के पटल पर रखा जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। हाल ही में साइबर अपराधियों द्वारा श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और ‘नीलाद्रि भक्त निवास’ के नाम पर फर्जी वेबसाइटें बनाकर श्रद्धालुओं से मुफ्त दर्शन, वीआईपी पास, ऑनलाइन पूजा और कमरों की बुकिंग के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने के मामले सामने आए हैं, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की है।

4 .श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, मथुरा, उत्तर प्रदेश

मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में श्रद्धालुओं के चढ़ावे, दान और आभूषणों में भारी वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।श्री कृष्ण जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संत दिनेश फलाहारी महाराज ने मंदिर प्रबंधन पर दान में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और नकदी की चोरी का आरोप लगाया उन्होंने दावा किया कि जब मंदिर के दानपात्र (गुल्लक) खोले जाते हैं, तब जानबूझकर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं।फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से चिट्ठी लिखकर इस कथित घोटाले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग की थी।

उन्होंने प्रबंधन से जुड़े लोगों पर अवैध रूप से करीब 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने का भी आरोप लगाया। आरोपों के बाद, मंदिर का संचालन करने वाले ‘श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान’ ने इन दावों को पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया। ट्रस्ट ने फलाहारी महाराज के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी, जबरन वसूली (20 लाख रुपये की मांग) और मंदिर की छवि खराब करने की शिकायत दर्ज कराई।

इन आरोपों के कुछ ही दिनों बाद, फलाहारी महाराज अपने बयानों से पूरी तरह पलट गए। उन्होंने अपना आरोप वापस लेते हुए कहा कि उन्हें किसी पुजारी ने गलत जानकारी दी थी। अब उन्होंने मंदिर की वर्तमान व्यवस्था, सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी को बेहतरीन और पारदर्शी बताया है।

5. शिर्डी साईबाबा मंदिर, महाराष्ट्र

शिर्डी के श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट में समय-समय पर कुछ प्रमुख घोटाले और गबन के मामले सामने आए हैं, अक्टूबर 2025 में ट्रस्ट के विद्युत विभाग में करीब ₹76.13 लाख की कीमती विद्युत सामग्री के गबन और हेराफेरी का खुलासा हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता संजय काले ने आरटीआई (RTI) के जरिए दस्तावेज निकाले। जांच में सामने आया कि 2017 से 2023 के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर कीमती सामान को ‘डेड स्टॉक रजिस्टर’ में फर्जी तरीके से दर्ज कर गायब कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ के आदेश के बाद शिरडी पुलिस ने विद्युत विभाग के 47 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की।

जून 2024 में मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की गिनती के दौरान लाखों रुपये की नकदी चोरी होने का मामला सामने आया। दिर में पिछले 30 सालों से कार्यरत एक स्थायी कर्मचारी बाळासाहेब नारायण गोंदकर नोटों की गिनती के समय ₹500 के नोटों के बंडल अपनी पैंट और कपड़ों में छिपा लेता था। वह रोजाना करीब ₹10,000 की चोरी कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर यह चोरी पकड़ी गई। करीब 1.5 से 3 लाख रुपये से अधिक की चोरी के आरोप में ट्रस्ट ने कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इसके अलावा यहाँ पर कुछ धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों और फर्जी वेबसाइटों द्वारा साईं बाबा संस्थान के नाम से मिलते-जुलते नाम जैसे ‘श्री साईबाबा सेवाभावी संस्थान बनाकर भक्तों से फर्जी ऑनलाइन डोनेशन वसूलने का घोटाला सामने आया था।

देश भर के प्रमुख मंदिरों में हो रहे इन घोटालों की श्रृंखला साफ संकेत दे रही है कि मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है। चाहे राम मंदिर ट्रस्ट हो, तिरुपति देवस्थानम, जगन्नाथ पुरी, कृष्ण जन्मभूमि या शिर्डी साईं बाबा ट्रस्ट हर जगह दान, चढ़ावा और संपत्ति के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं, लेकिन पूर्ण जांच और सजा का अभाव हर जगह एक समान है।

उल्लेखनीय है कि जांच किसी भी मामले की पूरी नहीं हुई है अगर पूरी भी हो गई तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई,,, ध्यान देने वाली बात यह भी है कि एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद इनमें से ज्यादातर मामलों में कोई बड़ा दोषी आज तक सजा नहीं पाया है। यह स्थिति न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की भी मिसाल है।

अब सवाल यह है कि मंदिरों को आस्था के केंद्र के रूप में बनाए रखना है या इन्हें अनियंत्रित वित्तीय साम्राज्यों में बदलने दिया जाएगा? क्या समय आ गया है कि सभी प्रमुख मंदिर ट्रस्टों की नियमित स्वतंत्र ऑडिट, RTI के दायरे में लाने और पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की जाए? द लेंस लगातार इस मुद्दे पर नजर रखेगा। हमारी रिपोर्टिंग जारी रहेगी। आपकी क्या राय है? क्या मंदिर प्रबंधन में बड़े सुधार की जरूरत है? कमेंट सेक्शन में अपनी बात रखें।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now