नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच यह चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो भारत के हथियार खरीद से जुड़ी है। भारत ने कई देशों को पीछे छोड़ते हुए हथियार खरीद के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। भारत से आगे यूक्रेन है, जो फिलहाल रूस के खिलाफ युद्ध में है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक हथियारों की खरीद में हो रहे बदलावों को उजागर किया है। 2020 से 2024 के बीच प्रमुख हथियारों के आयात-निर्यात में कुल मात्रा में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यूरोप में मांग के उछाल ने पूरी तस्वीर ही बदल दी।
रूस के निर्यात में भारी कमी के बीच भारत ने अपनी खरीदारी में विविधता लाई है, जहां फ्रांस अब प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के अनुसा भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है, जबकि यूक्रेन ने रूस के आक्रमण के बाद सहायता प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।
SIPRI की ‘ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्स, 2024’ रिपोर्ट बताती है कि 2020-24 के दौरान वैश्विक हथियार हस्तांतरण की कुल मात्रा 2015-19 की तुलना में 0.6 प्रतिशत घटी। हालांकि, यूरोपीय देशों में आयात 155 प्रतिशत बढ़ गया, जो मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजी सुरक्षा चिंताओं का परिणाम है। यूरोप ने वैश्विक आयात का 28 प्रतिशत हिस्सा हथिया लिया, जबकि एशिया-ओशिनिया क्षेत्र का योगदान 33 प्रतिशत रहा। मध्य पूर्व में भी 27 प्रतिशत की हिस्सेदारी बनी हुई है, लेकिन अफ्रीका और अमेरिका में कमी आई।
यूक्रेन का उभार और भारत की स्थिरता

2020-24 में यूक्रेन ने वैश्विक आयात का 8.8 प्रतिशत हिस्सा लिया, जो 2015-19 की तुलना में 9,627 प्रतिशत की भारी छलांग है। जर्मनी, अमेरिका और पोलैंड जैसे सहयोगियों से मिली सैन्य सहायता ने इसे संभव बनाया, जिसमें यूक्रेन को वैश्विक हथियारों का 9.7 प्रतिशत हिस्सा मिला।
दूसरी ओर भारत ने 8.3 प्रतिशत शेयर के साथ दूसरा स्थान बरकरार रखा, हालांकि इसकी कुल खरीदारी में 9.3 प्रतिशत की हल्की कमी आई। चीन और पाकिस्तान से सीमा विवादों के बीच भारत की यह स्थिति घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है, लेकिन विदेशी निर्भरता अभी भी बरकरार है।
शीर्ष पांच आयातक देशों में कतर और सऊदी अरब तीसरे-चौथे स्थान पर हैं (दोनों 6.8 प्रतिशत), जबकि पाकिस्तान पांचवें पर (4.6 प्रतिशत, 61 प्रतिशत वृद्धि)। ये आंकड़े बताते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक हथियार बाजार को कैसे आकार दे रहे हैं।
भारत की नजरें पश्चिम की ओर

निर्यातकों में अमेरिका का दबदबा कायम है, जिसका 43 प्रतिशत वैश्विक शेयर है और 21 प्रतिशत वृद्धि हुई। फ्रांस ने रूस को पीछे छोड़ दिया, जबकि रूस तीसरे स्थान पर खिसक गया।
भारत की हथियार खरीदारी में सबसे बड़ा बदलाव रूस पर निर्भरता में कमी है। 2015-19 में रूस से 55 प्रतिशत आयात होने वाले भारत का यह आंकड़ा अब घटकर 36 प्रतिशत रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब रूस के निर्यात का 38 प्रतिशत हिस्सा लेता है, जो पहले 48 प्रतिशत तक था। रूस के कुल निर्यात में 64 प्रतिशत की कमी आई है, जो यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों का असर है। रूस के अन्य प्रमुख ग्राहक चीन (17 प्रतिशत) और कजाकिस्तान (11 प्रतिशत) हैं।
इसकी जगह फ्रांस ने मजबूती से कदम रखा है। 2020-24 में भारत ने अपने कुल आयात का 33 प्रतिशत फ्रांस से लिया, जो वैश्विक स्तर पर फ्रांस के निर्यात का 28 प्रतिशत हिस्सा है। फ्रांस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन चुका है (9.6 प्रतिशत वैश्विक शेयर, 11 प्रतिशत वृद्धि) और भारत इसका सबसे बड़ा बाजार है।
इजराइल (13 प्रतिशत) और अमेरिका जैसे पश्चिमी देश भी भारत की सूची में ऊपर चढ़ रहे हैं। एसआईपीआरआई के अनुसार, “भारत अपनी आपूर्ति संबंधों को पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं खासकर फ्रांस, इजराइल और अमेरिका की ओर मोड़ रहा है, भले ही रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बने हुए हैं।”
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एसआईपीआरआई के शोध निदेशक डिएगो लोपेज डा सिल्वा ने कहा, “यूरोप में हथियार आयात का तिगुना होना वैश्विक प्रवाह को बदल रहा है, लेकिन एशिया में भारत जैसे देश अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप स्रोत बदल रहे हैं।” भारत के संदर्भ में, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह विविधीकरण ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करेगा, लेकिन रूस से पुराने अनुबंध अभी भी प्रभावी हैं।











