नई दिल्ली | केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की जांच में यह सामने आने के एक दिन बाद कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने अपनी (Pellet gun) से कम से कम सात राउंड फायर किए, जिनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे। अब संसद मार्ग थाने की जनरल डायरी यानि जीडी से पता चला है कि आरएएफ ने एक पुलिस उपायुक्त के निर्देश पर एंटी-रायट गन से दो राउंड प्लास्टिक पैलेट कारतूस दागे थे।गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरों को पूरी तरह झूठा बताया था।
समाचार पत्र द हिंदू द्वारा डायरी एंट्री के विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई की रात 1:24 बजे दर्ज इस एंट्री में कहा गया है कि ‘डीसीपी के आदेश पर’ आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट ने एंटी-रायट गन से 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल, पांच आंसू गैस ग्रेनेड और प्लास्टिक पैलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस के दो राउंड दागे।आरएएफ, जो सीआरपीएफ की दंगा-रोधी इकाई है, को 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में तैनात किया गया था। उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विभिन्न छात्र संगठनों के साथ मिलकर ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित किया था।
प्रदर्शनकारी उस समय के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरें सबसे पहले 20 जुलाई को सामने आई थीं. कॉकरोच जनता पार्टी ने भी घायल शेख इरशाद मंसूरी की तस्वीर साझा कर यह दावा किया था। इस मामले पर द लेंस ने भी रिपोर्ट की थी। इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरें झूठी हैं।
नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा था, ‘यह दावा कि पुलिस बल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल कर रहे हैं, पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। जनता से अपील है कि अपुष्ट सूचनाओं को साझा या प्रसारित न करें. किसी भी जानकारी को पोस्ट या फॉरवर्ड करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से तथ्यों की पुष्टि करें”
हालांकि, 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद कई नागरिकों ने गंभीर पैलेट चोटों की जानकारी दी इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के 19 वर्षीय एक छात्र भी शामिल हैं। जिनकी एक आंख की रोशनी जाने की आशंका जताई गई है।पैलेट गन, जिन्हें भारतीय सुरक्षा बल अक्सर घातक गोलियों के अपेक्षाकृत कम घातक विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं, मुख्य रूप से कश्मीर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में भीड़ नियंत्रण के लिए उपयोग में लाई जाती रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को इन्हें पहली बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया।पैलेट गन से घायल होने की विभिन्न खबरों के बीच दो पीडितों – प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूर ने 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नागरिकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से धातु वाले पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।








