नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयक के गिरने पर देश के नाम दिया गया सन्देश विवादों के घेरे में आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है वहीँ बौद्धिक हलकों में भाषण की टाइमिंग और चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। Model Code of Conduct
सीपीआई ने लिखा चुनाव आयोग को पत्र
दरअसल पांच राज्यों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता 15-16 मार्च से ही लागू है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को लिखे एक लेटर में, राज्यसभा में CPI सांसद पी संदोष कुमार ने चल रहे चुनावों के बीच PM मोदी के भाषण पर चिंता जताई है। लेटर में आरोप लगाया गया कि भाषण का टोन और कंटेंट पॉलिटिकल था, जिसमें पार्टी वाली बातें थीं और ऐसे समय में पब्लिक ओपिनियन को प्रभावित करने की कोशिश की गई जब कई राज्यों में चुनाव चल रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
आपत्तिजनक भाषा, नियम विरोधी शब्द
पीएम मोदी का देश के नाम संबोधन महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन के लोकसभा में गिरने के एक दिन बाद दिया गया। इसमें पीएम मोदी ने विपक्षी दलों पर हमला किया, उन्होंने विपक्ष महिलाओं के साथ धोखा देने वाला बताया, और महिलाओं से विपक्ष को सबक सिखाने की अपील की। बात केवल पीएम मोदी की भाषा की ही नहीं थी इस्तेमाल किये गए शब्दों की भी थी। 2023 में महिला आरक्षण बिल लागू होने को पीएम मोदी ने बड़ी विजय बताया था लेकिन शनिवार के अपने भाषण में उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इसकी भ्रूण हत्या कर द गौरतलब है कि पीएम मोदी का भाषण दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रसारित हुआ।
क्यों कर है उल्लंघन
इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत लागू आदर्श आचार संहिता का सबसे प्रासंगिक खंड “VII. Party in Power” है , जो केंद्र सरकार पर भी लागू होता है जब MCC चुनाव वाले राज्यों के लिए लागू हो।मोदी जी के भाषण को इस खंड के निम्न प्रावधानों के तहत आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जा रहा है।
खंड VII (iv): इस खंड में कहा गया है की चुनाव अवधि में सरकारी जनसंचार माध्यमों जैसे दूरदर्शन, आकाशवाणी, संसद टीवी का पक्षपातपूर्ण राजनीतिक प्रचार या सत्ताधारी दल के हित साधने के लिए दुरुपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सरकारी मीडिया का उपयोग करके विपक्ष पर हमला किया गया, जो पक्षपाती माना जा रहा है।
खंड VII (i)(a) और (b):सरकारी तंत्र, मशीनरी या कार्मिकों (machinery/personnel) का उपयोग सत्ताधारी दल के हित में नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री का पद इस्तेमाल करके आधिकारिक संबोधन देना, जो वास्तव में चुनावी मुद्दे पर विपक्ष-विरोधी था. इस नियम के अंतर्गत आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।
राज्य के साथ केंद्र पर भी लागू होते हैं नियम
महत्वपूर्ण है कि MCC के सारे प्रावधान केंद्र सरकार पर भी लागू होते हैं जब MCC चुनाव वाले राज्यों के लिए सक्रिय हो। विपक्ष का कहना है कि संबोधन ने MCC के दौरान पीएम ने अपने पद का इस्तेमाल करके BJP के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर इंदिरा गांधी पर हुई थी कार्रवाई
इंदिरा गांधी के 1971 के चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन सिन्हा ने 12 जून 2975 के फैसले में दो आधार पर अवैध घोषित किया था। द लेंस के पत्रकार सुदीप ठाकुर बताते हैं कि पहला आधार यशपाल कपूर का पीएम एस यानी प्रधानमंत्री सचिवालय से इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था, जबकि मौखिक तौर पर प्रिंसिपल सेक्रेटरी पी एन हक्सर ने स्वीकार कर लिया था। दूसरा, इंदिरा की सभा में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। उस समय शायद लंदन टाइम्स या टेलीग्राफ ने लिखा था कि यह वैसा ही है, जैसे ब्रिटिश पीएम को ट्रैफिक वाएलेशन के आरोप में पद से हटा दिया जाए। मोदी का मामला उससे अधिक गंभीर है











