नई दिल्ली। एक सवाल सभी के जेहन में है कि क्या वजह है कि TMC से टूटे बागी नेताओं ने बीजेपी में शरण लेने के बजाय एक नई पार्टी एनसीपीआई की शरण ली और एनडीए को समर्थन करने का फैसला किया? गौरतलब है कि बागी गुट की अगुवाई कर रही कोकिला घोष दस्तीदार 22 सांसदों के समर्थन का दावा कर रही हैं। उन्होंने बागी गुट के सांसदों के साथ स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात भी की थी।
द लेंस ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए कल जारी हुए वीडियो का जिसमें बागी गुट, ओम बिरला से मिल रहा हैं अलग अलग फ्रेम में A I के माध्यम से तहकीकात की। जो जवाब मिला वह चौंकाने वाला था
पिक्सलर और ग्राेक का विश्लेषण
वीडियो में मुख्य रूप से लगभग 15-16 लोग एक साथ नजर आ रहे हैं। वीडियो लगभग 2 मिनट 13 सेकंड का अलग-अलग क्लिप्स का मिक्सचर है, जिसमें TMC के बागी सांसदों और संबंधित लोगों की बैठक के विजुअल्स हैं। मुख्य सीन के अनुसार गिनती:
- स्टैंडिंग ग्रुप फोटो वाला सीन (फ्रेम 7 और 10 में): सबसे बड़ा ग्रुप। यहां लगभग 15-16 लोग मुख्य रूप से पुरुष और कुछ महिलाएं लाइन में या ग्रुप में खड़े नजर आ रहे हैं।
- सिटिंग ग्रुप वाला सीन (फ्रेम 2 और 5): 5 लोग साफ नजर आ रहे हैं 3 पुरुष + 2 महिलाएं।
- स्पीकर वाला सीन (फ्रेम 1 और 4): मुख्य रूप से 1-2 लोग (लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जैसे व्यक्ति + आंशिक रूप से एक महिला)।
- दो लोगों वाला सीन (फ्रेम 6 और 9): 2 लोग सोफे पर बैठे।
- अन्य क्लिप (जैसे लिखते हुए व्यक्ति): 1-2 लोग।
कुल मिलाकर वीडियो में अलग-अलग सीन में 15-16 लोगों का बड़ा ग्रुप सबसे प्रमुख है, और यही “कुल संख्या” को दर्शाता है।
केवल 14 या 15 बागी सांसद
नहीं भुला जाना चाहिए कि इसमें ओम बिरला को भी एक व्यक्ति के तौर पर गिना गया है इसलिए वास्तविक बागियों की संख्या 14 या 15 हो सकती है जो इस वीडियो में दिख रहे हैं।
कितने सांसदों पर मिलेगी मान्यता?
भारत में दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत बिना सदस्यता गंवाए पार्टी से अलग होने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का एक साथ अलग होना जरूरी है।
वर्तमान में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसद हैं, इसलिए बागी गुट को कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 20 सांसदों का समर्थन चाहिए होगा।
संख्या कम होने की वजह से ही संभवतः बीजेपी ने इन्हें अपनी पार्टी में शामिल नहीं किया। वही बागियों ने सोचा कि नई पार्टी में होने पर संख्या बढ़ने की संभावना ज्यादा रहेगी।











