नई दिल्ली | देश की राजधानी दिल्ली में खबरनवीसों के मिलने बैठने के साथ साथ, बड़ी बहसों और गोष्ठियों के ठिकाने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (Press Club of India)से शर्मनाक खबर आ रही है। प्रेस ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री मोदी की ईश्वरीय वेशभूषा में आदमकद चित्र के सामने पीएम मोदी की चालीसा पढ़ी गई है और आरती का वीडियो वायरल हुआ है।
क्लब ने कार्यक्रम से किनारा करते हुए कहा है कि हॉल किराए पर देने की शर्तों के उल्लंघन पर इसे रुकवाया गया। जबकि सच्चाई यह है कि जिस संस्था के नाम पर यह कार्यक्रम किया गया उसने हाल में ही पटना में मोदी के नाम पर 110 करोड़ की लागत से मंदिर बनाने का ऐलान किया है।
दिनदहाड़े गजब तमाशा
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कहा कि परिसर में पहले आयोजित एक कार्यक्रम की फोटो और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। क्लब ने स्पष्ट किया कि उसने इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया था।वायरल वीडियो में कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र के सामने आरती करता और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करता नजर आ रहा है। कार्यक्रम के दौरान ‘जय-जय मोदी और हर-हर मोदी’ के नारे भी लगाए गए। नहीं भुला जाना चाहिए कि प्रेस क्लब का एक कर्मचारी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की वेशभूषा में अक्सर नजर आता है। प्रबंधन ने इस पर कभी कोई आपत्ति नहीं की है।
प्रेस क्लब ने क्या कहा
क्लब के अनुसार, एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए परिसर का हॉल किराये पर लिया था। हालांकि, जगह किराये पर देने की शर्तों का उल्लंघन किए जाने पर क्लब अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और कार्यक्रम रुकवा दिया।
प्रेस क्लब ने बताया कि जिस संगठन को हॉल प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए किराये पर दिया गया था, उसने परिसर के इस्तेमाल से जुड़ी शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन किया। इसके बाद क्लब अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रोक दिया।
किन्नर कल्याण बोर्ड का आयोजन
ये आयोजन बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड की ओर से किया गया था इसके सदस्य डॉ. राजन सिंह (ट्रांसजेंडर) की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है इसमें लिखा है कि कार्यक्रम में किन्नर समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को भगवान श्रीराम का अवतार बताते हुए भव्य मंदिर निर्माण की बात रखी गई।
क्या प्रेस क्लब के दावों और सच्चाई में अंतर है
वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव जोकि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के प्रबंधन में पूर्व के सेवाएं दे चुके है कहते हैं कि पिछले 12 वर्षों में प्रेस क्लब का जो वैचारिक पतन हुआ है यह उसका जीता जागता नमूना है। यह कहना झूठ है कि प्रबंधन को पहले से इस कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी।
रोज शाम को संसद मार्ग थाने का आदमी आकर रजिस्टर का फोटो खींचकर ले जाता है कि अगले दिन क्या कार्यकम हैं। सच्चाई यह है कि पिछले 12 वर्षों के दौरान गौतम लाहिड़ी के अध्यक्ष बनने के बाद से ऐसी घटनाएं बार बार घटी है।
मौजूदा अध्यक्ष संगीता बरुआ भी उससे अलग नहीं हैं। अभिषेक कहते हैं कि बिना किसी पत्रकार के कहे प्रेस क्लब बुक नहीं हो सकता निश्चित तौर पर किसी पत्रकार ने ही इसे बुक कराया है। अभिषेक बताते है कि पत्रकार विश्वदीपक के मामले में पुणे पुलिस ने सारे रजिस्टर उठा लिए थी कि किस पत्रकार ने कौन से कार्यक्रम के लिए बुकिंग कराई। अभिषेक इसे काला दिन बताते हैं।








