पहली परीक्षा में निपट गए सम्राट

बिहार की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के परिणाम राज्य की सत्ताधारी भाजपा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए बड़ी चुनौती साबित होंगे। इस चुनाव परिणाम को न केवल बीजेपी प्रत्याशी नीरज कुमार बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम सम्राट चौधरी की हार के तौर पर देखा जा रहा है। नहीं भुला जाना चाहिए कि करीब तीन दशक से इस सीट पर भाजपा का कब्जा था।

यह उपचुनाव भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा में चुने जाने के बाद खाली हुई सीट पर हो रहा था। ज्ञात रहे कि नबीन ने नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद की रेखा कुमारी को 50 हजार से अधिक वोटों से हराकर पांचवीं बार जीत दर्ज की थी। बांकीपुर को 1995 से भाजपा का अभेद्य गढ़ माना जाता था। जन सुराज पार्टी ने 2025 के विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर लड़कर एक भी सीट नहीं जीती थी और अधिकांश जगह जमानत जब्त हुई थी। ऐसे में बांकीपुर में पहली जीत पीके के लिए ऐतिहासिक साबित हुई।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नतीजों के बाद प्रशांत किशोर को बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “जनता ने बांकीपुर में जन सुराज को चुना है। मैं श्री प्रशांत किशोर जी को हार्दिक बधाई देता हूं और जनता के फैसले का सम्मान करता हूं।” लेकिन प्रशांत किशोर ने जीत के तुरंत बाद सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। पीके के अनुसार राज्य चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने बिहार की कमान ऐसे व्यक्ति को सौंपी जिनकी आपराधिक प्रवृत्तियां और आचरण संदिग्ध हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा नेतृत्व बिहार की जनता को स्वीकार्य नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषक इस नतीजे को भाजपा के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। बांकीपुर पटना का शहरी और प्रभावशाली इलाका है जहां मध्यवर्ग और युवा मतदाताओं की अच्छी संख्या है। यहां की हार को सिर्फ एक सीट का नुकसान नहीं बल्कि सत्ताधारी दल की छवि पर लगे धब्बे के रूप में देखा जा रहा है। नितिन नबीन के जाने के बाद सीट बचाने की जिम्मेदारी नीरज कुमार जैसे युवा नेता पर थी, लेकिन पीके की जन-जुड़ाव वाली रणनीति और भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर हमले ने भाजपा को पीछे धकेल दिया। नहीं भुला जाना चाहिए कि प्रशांत सम्राट के आपराधिक इतिहास पर बार बार चोट करते रहे हैं। नीतीश के बाद सम्राट चौधरी की ताजपोशी को लेकर शुरू से ही भाजपा के खेमे में बेचैनी थी। पद संभालने के बाद उनके बयानों और अपराध के बढ़ते ग्राफ ने उनके लिए मुश्किले बढ़ा रखी हैं अब ऐसे के यह हार उनके लिए और ज्यादा तनाव की वजह बनेगी।

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