पश्चिम बंगाल में 44 सीटों पर SIR का बड़ा असर, TMC-BJP में आरोप-प्रत्यारोप तेज

West Bengal Sir

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसमें पूरे राज्य में करीब 91 लाख नाम हटाए गए। इससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.77 करोड़ रह गई। यानी करीब 12 प्रतिशत की कमी।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 293 विधानसभा सीटों में से 15 प्रतिशत यानी 44 सीटों पर 2021 के चुनावों में जीत के अंतर से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। इनमें से 24 सीटें तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीती थीं, जबकि 20 भाजपा के खाते में गई थीं। एक सीट (दिनहाटा) को विश्लेषण से बाहर रखा गया क्योंकि वहां ईवीएम के अलावा पोस्टल बैलट से फैसला हुआ था।

चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि इन सीटों पर वोटर डिलीशन से करीबी मुकाबलों का समीकरण बिगड़ सकता है। 2021 में जहां TMC या भाजपा की जीत कुछ हजार वोटों से हुई थी, वहां अब वोटर बेस घटने से टर्नआउट प्रभावित हो सकता है। डिलीशन ज्यादातर मुस्लिम-बहुल इलाकों (जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर/दक्षिण 24 परगना) और कुछ मतुआ-प्रभावित क्षेत्रों (नदिया) में केंद्रित हैं, जहां TMC का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत रहा है। हालांकि, कुछ जगहों पर भाजपा के मतुआ वोटर भी प्रभावित हुए हैं। कुल मिलाकर, यह 120 से ज्यादा सीटों को प्रभावित कर सकता है, जहां पहले की बढ़त अब पतली हो गई है। चुनाव आयोग का दावा है कि यह मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अपात्र (घुसपैठिए समेत) मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया है, जो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई।

पश्चिम बंगाल की सियासत में यह मुद्दा अब चुनाव का सबसे बड़ा एजेंडा बन गया है। TMC इसे “लक्षित वोटर पर्ज” और “वोट चोरी” बता रही है, जबकि भाजपा इसे “फर्जी वोटरों की सफाई” मानकर अपना फायदा बता रही है। अल्पसंख्यक-बहुल जिलों में ज्यादा कटौती होने से TMC का आरोप है कि यह उनके वोट बैंक को कमजोर करने की साजिश है। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि TMC ने सालों से फर्जी वोटरों पर भरोसा किया था, अब साफ-सुथरा चुनाव होगा।

TMC नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसे सीधे भाजपा-ECI सांठगांठ बताया। उन्होंने कहा, “नाम काटकर TMC को नहीं हराया जा सकता। हम कोर्ट जाएंगे और नाम बहाल करवाएंगे।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि मतदाताओं से “डिलीशन का बदला” वोट देकर लें। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि SIR से पहले ही भाजपा ने 1-1.2 करोड़ नाम काटने का टारगेट फिक्स कर लिया था। उन्होंने कहा कि कुल 91 लाख में से 63 प्रतिशत बंगाली हिंदू हैं, फिर भी सवाल उठने पर “get lost” जैसा जवाब मिला। अभिषेक ने वादा किया कि अगर TMC सत्ता में आई तो हटाए गए नाम बहाल किए जाएंगे।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा के राज्यसभा सांसद और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “कोई वैध मतदाता नहीं हटाया गया। सिर्फ फर्जी, मृत और घुसपैठिए हटे हैं।” उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत हटाए गए नाम TMC के वोटर थे और इससे भाजपा 177 से ज्यादा सीटें जीत सकती है। प्रभावित मतदाताओं को ट्रिब्यूनल में अपील करने की सलाह दी। भाजपा इसे “निष्पक्ष चुनाव” की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।

क्या कहता है चुनाव आयोग?

ECI ने साफ किया कि SIR पूरे देश में हुई, लेकिन बंगाल में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों ने 60 लाख से ज्यादा मामलों की सुनवाई की। 27 लाख नाम ही अंतिम रूप से हटाए गए। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी और जरूरी थी।

चुनावी माहौल गर्म है। TMC का दावा है कि वह 250 सीटों का टारगेट लेकर चल रही है और लो-मार्जिन सीटों पर खास फोकस कर रही है। भाजपा इसे अपना ब्रेकथ्रू मान रही है। 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है, जो अंतिम फैसला दे सकती है। फिलहाल, दोनों पार्टियां मैदान में पूरी ताकत झोंक रही हैं—एक नाम बहाल करने की कोशिश में, दूसरी “साफ सूची” के फायदे पर।

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