लेंस डेस्क ।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित हुआ। गुजरात के एकता नगर में हुए इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कन्नड़ सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया।
यह सम्मान पाने वाले अनंत नाग दूसरे कन्नड़ कलाकार हैं। इससे पहले केवल दिग्गज अभिनेता राजकुमार को यह पुरस्कार मिला था।
कला को प्राथमिकता, भाषा नहीं
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। 1969 में इसकी शुरुआत हुई थी। अब तक 56 कलाकारों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। इनमें से लगभग आधे यानी 28 कलाकार ऐसे हैं जिनकी मुख्य पहचान हिंदी सिनेमा से बाहर रही है।
हिंदी सिनेमा की पहली विजेता देविका रानी थीं। राज कपूर परिवार के तीन सदस्यों को भी यह सम्मान मिल चुका है।
अनंत नाग का सफर
अनंत नाग का फिल्मी सफर पांच दशक लंबा है। उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया है, जिनमें से 250 कन्नड़ भाषा की हैं।
1948 में कर्नाटक के शिराली में जन्मे अनंत नाग ने पहले रंगमंच से शुरुआत की। 1973 में फिल्म ‘संकल्प’ से उन्होंने सिनेमा में कदम रखा। ‘अंकुर’, ‘निशांत’, ‘मंथन’ और ‘भूमिका’ जैसी फिल्मों ने उन्हें समांतर सिनेमा का जाना-माना चेहरा बना दिया। सम्मान मिलने पर वे भावुक नजर आए।
क्षेत्रीय सिनेमा की मजबूत भागीदारी
पिछले 56 वर्षों में 25 पुरस्कार उन कलाकारों को मिले हैं जिनका मुख्य काम बांग्ला, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी या असमिया सिनेमा में रहा। तीन कलाकारों का योगदान हिंदी और क्षेत्रीय दोनों सिनेमा में बराबर रहा—दुर्गा खोटे (1983), वी. शांताराम (1985) और मन्ना डे (2007)।
हिंदी के बाद सबसे ज्यादा पुरस्कार बांग्ला सिनेमा के कलाकारों को मिले हैं (10)। दक्षिण भारत में तेलुगु सिनेमा सबसे आगे है, जहां छह दिग्गजों को यह सम्मान मिल चुका है।
विजेताओं की प्रतिक्रियाएं
‘आर्टिकल 370’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली यामी गौतम भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “जीवन में हार न मानने का अपना अलग मजा है।” उनके पति आदित्य धर को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला। आदित्य ने यामी को असली धुरंधर बताया।
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार ममूटी और कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से मिला। कार्तिक आर्यन ने कहा कि उनके पास भावनाएं व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं और उनका सपना सच हो गया है। चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले ममूटी ने ‘ब्रह्मयुगम’ की पूरी टीम का आभार जताया।
‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के निर्देशक का पुरस्कार लेने वाले रणदीप हुड्डा ने इसे अपने अब तक के सबसे कठिन काम बताया।
अब पर्यटन स्थलों पर होगा समारोह
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ले जाया जाएगा। इससे सांस्कृतिक उद्देश्य बेहतर तरीके से पूरा हो सकेगा। केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्रस्ताव मांगे हैं।
बच्चों और अन्य कलाकारों को सम्मान
2024 के सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का पुरस्कार पांच बच्चों में बांटा गया। इनमें बांग्ला फिल्म ‘ऑको की कोठिन’ के तीन बच्चों—रिद्धिमान बनर्जी, तपोमय देब और गीताश्री चक्रवर्ती—को उनके स्वाभाविक अभिनय के लिए चुना गया।
अन्य प्रमुख पुरस्कार इस प्रकार हैं:
- सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका: नेत्रबाधित गायिका वैकोम विजयलक्ष्मी (मलयालम फिल्म ‘एआरएम’ का गीत ‘अंगू वाना कोनिलु’)
- सर्वश्रेष्ठ निर्देशन: राजकुमार पेरियासामी (तमिल फिल्म ‘अमरन’)
- सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता: संजय मिश्रा (हिंदी फिल्म ‘भक्षक’)
- सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री: सच्चाना नामीदास (‘महाराजा’-तमिल) और रोपाश्री वर्काडी (‘मिथ्या’-कन्नड़) को संयुक्त रूप से
यह समारोह सिर्फ पुरस्कार देने का मौका नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की विविधता और कला की ताकत को रेखांकित करने वाला मंच भी साबित हुआ।











