AIADMK में दो फाड़, बागी गुट विजय के साथ

तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी AIADMK आखिरकार टूट गई। पार्टी के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) के 72वें जन्मदिन पर ही बागी गुट ने पार्टी से अलग होकर अभिनेता विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को समर्थन देने और कैबिनेट में शामिल होने का फैसला कर लिया है।

बागीयों का EPS पर आरोप

मंगलवार सुबह चेन्नई में बागी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह फैसला घोषित किया। पूर्व मंत्री सी. वी. शनमुगम ने कहा कि EPS डीएमके के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि AIADMK की नीति हमेशा से डीएमके का विरोध रही है। शनमुगम ने कहा, AIADMK की स्थापना ही डीएमके का विरोध करने के लिए हुई थी। हम पांच दशक से उनका मुकाबला करते आए हैं लेकिन EPS डीएमके के समर्थन से मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। हमने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

पार्टी के बागी गुट ने फैसला किया है कि AIADMK और अम्मा के आंदोलन को बचाने के लिए वे विजय की TVK सरकार का साथ देंगे। उन्होंने पूर्व मंत्री एस. पी. वेलुमणि को अपना विधायक दल नेता चुना है और विधानसभा सचिव को पत्र सौंप दिया है।

EPS की मुश्किल बढ़ी

यह दिन EPS के राजनीतिक जीवन का सबसे कठिन दिन माना जा रहा है। पार्टी के अंदर EPS के समर्थक अब काफी कम रह गए हैं। एक नेता ने कहा, ‘धीरे-धीरे बचे हुए विधायक भी चले जाएंगे। EPS अब नया ओ. पन्नीरसेल्वम बन सकते हैं।’ AIADMK ने हाल ही में हुए चुनाव में 47 सीटें जीती थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन की पत्नी लीमा रोज मार्टिन ने इस विभाजन में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में AIADMK में शामिल हुई लीमा ने विद्रोही गुट और TVK के बीच बातचीत का पुल बनाया। उनका दामाद आदव अर्जुना विजय सरकार में मंत्री हैं।लीमा ने 5 मई की रात को सबसे पहले सार्वजनिक रूप से AIADMK और TVK के बीच बातचीत चलने की जानकारी दी थी।

कॉर्पोरेट प्रभाव का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस विभाजन में कॉर्पोरेट लॉबी का भी खासा हाथ है। कुछ विधायकों पर आर्थिक प्रलोभन दिए जाने के आरोप भी लगे हैं, हालांकि इनकी स्वतंत्र जांच नहीं हुई है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता EPS के साथ अभी भी डटे हुए हैं, जिनमें आर. बी. उदयकुमार, ओ. एस. मणियन, कृष्णमूर्ति, थलावई सुंदरम और के. पी. मुनुसामी शामिल हैं। जयललिता के निधन के बाद से AIADMK में बार-बार टूट की आशंका बनी रही थी। EPS ने पिछले करीब 10 साल तक पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश की, लेकिन मंगलवार को यह कोशिश आखिरकार नाकाम हो गई।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories