West Bengal SIR: मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए गए, ममता ने कहा- खास समुदाय को बनाया गया निशाना

April 7, 2026 5:25 PM
West Bengal SIR

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर संशोधन Special Intensive Revision  यानी SIR के बाद करीब 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे कुछ समुदायों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को 24 घंटे के अंदर संबंधित सूचियां (supplementary lists) जारी करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि लगभग 60 लाख मामलों की अदालती समीक्षा जल्द पूरी की जाए और सूची तुरंत सार्वजनिक किए जाएं। इस निर्देश के बाद आयोग ने जिला-वार डेटा जारी किया और प्रक्रिया को तेज किया। कोर्ट की निगरानी में 705 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों ने इन मामलों की जांच की।

नवंबर 2025 से शुरू हुई SIR प्रक्रिया में शुरू में 63.66 लाख नाम हटाए गए। हटाए गए नाम मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट या अनुपस्थित श्रेणी में थे।

फरवरी 2026 की अंतिम सूची में कुल हटाए गए नामों की संख्या 90.83 लाख (करीब 91 लाख) पहुंच गई।

लगभग 60.06 लाख मामलों को “अंडर एडजुडिकेशन” रखा गया था। इनमें से 27.16 लाख नाम अंततः हटा दिए गए, जबकि 32 लाख से ज्यादा नाम बहाल कर लिए गए।

ममता बनर्जी का आरोप

मंगलवार को नदिया जिले के चक्रदह में एक रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ विशेष समुदायों के मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नामों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाया जा रहा है, खास समुदायों को निशाना बनाकर।

उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस उन सभी लोगों का समर्थन करेगी जिनके नाम सूची से गायब हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपनी दखल के बाद करीब 32 लाख नाम बहाल करवाए गए, जो लगभग 60 लाख लंबित मामलों में से थे।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि सीमावर्ती इलाकों में सबसे ज्‍यादा नाम काटे गए।

किन जिलों में ज्यादा नाम हटे?

मुर्शिदाबाद और मालदा में सबसे अधिक मामले करीब 7 लाख के आसपास प्रत्येक में अनुपयुक्त पाए गए। अन्य प्रभावित जिलों में कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना शामिल है। ये जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं और यहां अल्पसंख्यक आबादी ज्यादा है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

और नाम जुड़ सकते हैं या हट सकते हैं?

चुनाव आयोग के अनुसार, जांच के अधीन 60 लाख से ज्यादा मामलों में से ज्यादातर करीब 59.84 लाख के की जानकारी प्रकाशित हो चुकी है। बचे हुए करीब 22 हजार मामलों पर फैसला हो चुका है, लेकिन डिजिटल हस्ताक्षर अभी बाकी हैं।

इस प्रक्रिया के पूरा होते ही हटाए गए नामों की सूची में कुछ बदलाव हो सकते हैं। दूसरे चरण की सूची 9 अप्रैल तक फ्रीज हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट 13 अप्रैल को इस मामले पर फिर सुनवाई कर सकता है।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल हो है।  वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

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