नई दिल्ली। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बात की। टेलीफोनिक बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने पर जोर दिया। यह बातचीत अमेरिकी सीनेट द्वारा भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की मंजूरी दिए जाने के बाद हो रही है। नहीं भुला जाना चाहिए केंद्र सरकार ने अमेरिका से ट्रेड एग्रीमेंट किया है जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा, ‘अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस का फ़ोन आया। हमने अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की। मैंने उन्हें और ‘सेकंड लेडी’ को उनके बेटे के जन्म पर गर्मजोशी से बधाई दी और पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।’
जेडी वेंस का पीएम मोदी को फोन ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी सीनेट ने रूस से पेट्रोलियम पदार्थ खरीदने वाले देशों के खिलाफ 100 फीसदी टैरिफ लगाने के कानून से संबंधित बिल को मंजूरी दे दी है।
अमेरिका का तर्क है कि तेल के इस व्यापार की वजह से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है और रूस को परोक्ष रूप से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है।अमेरिकी सीनेट में पारित यह बिल 86-11 मतों से पारित हुआ और इसका नाम बदलकर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड एक्ट ऑफ 2026 कर दिया गया है, जो उस रिपब्लिकन सीनेटर के नाम पर है जिन्होंने कीव की यात्रा के बाद 11 जुलाई को अपनी मृत्यु से पहले यह बिल तैयार किया था।
अमेरिका द्वारा सीनेट में पारित ये नया बिल सीधे तौर पर भारत और चीन के लिए चिंता का सबब बन सकता है क्योंकि भारत और चीन दोनों ही रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं। अगर यह टैरिफ लागू हुआ, तो भारत के अमेरिका निर्यात वाले व्यापार पर भारी खतरा मंडरा सकता है।
अमेरिकी सीनेट में पारित कानून की वजह से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन 5 देशों के अमेरिकी आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की ताकत मिली है, जो कि वर्तमान में रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीददार हैं। इसमें भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का नाम शामिल है।
इसके अलावा सीनेट द्वारा पारित यह अधिनियम 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम की समाप्ति तिथि को भी 2031 तक बढ़ा देता है, जिसके तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों को दंडित किया जाता है।
इस बीच, विधेयक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ रूसी कुलीन वर्ग, वरिष्ठ अधिकारियों और क्रेमलिन से जुड़े वित्तीय संस्थानों पर नए प्रतिबंध लगाता है।इस विधेयक से स्वतः शुल्क लागू नहीं होते बल्कि राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का विवेकाधीन अधिकार देता है, जिसका कार्यान्वयन अंतिम विधायी पाठ और कानून बनने के बाद कार्यकारी निर्णयों पर निर्भर करेगा।











