नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर संविधान के 131वें संशोधन पर हुए मतदान के दौरान विपक्ष के आंकड़े हासिल किए गए मतों से काफी ज्यादा हो सकते थे। विपक्ष के लगभग 12 लोकसभा सांसद किन्हीं कारणोंवश उपस्थित नहीं हो सके जिनमें अकेले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 7 सांसद थे।
कल मतदान के बाद राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच गुरुवार रात फोन पर बात हुई। जिसमें इस जीत पर दोनों ने एक दूसरे को बधाई दी। खुद अभिषेक बनर्जी भी बंगाल में चुनाव की वजह से अनुपस्थित थे।
यह बिल लोकसभा सीटों के परिसीमन (delimitation) से संबंधित था, जिसका मकसद 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू करना था।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने अभिषेक बनर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। टीएमसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के बावजूद अपने 28 में से 21 सांसदों को लोकसभा में वोटिंग के समय मौजूद रखा, जिससे बिल संविधान 131वां संशोधन बिल को हराने में मदद मिली।
दोनों नेताओं ने चर्चा की कि अगर विभिन्न दलों के 12 अनुपस्थित सांसद भी आ जाते तो विपक्ष को और ज्यादा वोट मिलते।
सूत्रों के मुताबिक अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से कहा, ‘लहरें बीजेपी के खिलाफ मुड़ रही हैं। पहले विपक्ष से क्रॉस वोटिंग होती थी, लेकिन अब वह खत्म हो गई है।’
इस फोन बातचीत से कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने टीएमसी के शुरुआती रुख पर आपत्ति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि वे केवल 4-5 सांसद ही वोटिंग के लिए भेज सकते हैं। राहुल ने तब कहा था कि सांसदों की अनुपस्थिति को बीजेपी की मदद के रूप में देखा जाएगा और इसका राजनीतिक नुकसान होगा।
अखिलेश यादव ने भी की ममता से बात
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी समेत सात टीएमसी सांसद चुनाव प्रचार में व्यस्त होने के कारण लोकसभा कार्यवाही में नहीं पहुंच सके। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस बड़ी जीत के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी से बात की। लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने टीएमसी के राज्यसभा फ्लोर लीडर से फोन पर बात कर फ्लोर कोऑर्डिनेशन की सराहना की।
विपक्ष को कुल 238 वोट मिल सकते थे, जिनमें से 230 वोट उसके पक्ष में पड़े। सरकार को 298 वोट मिले (अपनी ताकत से 5 ज्यादा), लेकिन बिल पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) जरूरी था, इसलिए बिल गिर गया। यह पहली बार है जब मोदी सरकार द्वारा लाया गया कोई बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका।
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