नई दिल्ली। बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में दोषी शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उसकी सजा पर अंतरिम राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। हालांकि, मामले में उसकी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहेगी और उस पर अंतिम फैसला बाद में होगा।
राम अवतार जग्गी की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी के नेतृत्व वाली सरकार थी। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। जांच के दौरान हत्या को राजनीतिक साजिश का परिणाम बताया गया और कई लोगों को आरोपी बनाया गया।
लंबी सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने कई आरोपियों को दोषी ठहराया था। बाद में मामले में विभिन्न स्तरों पर अपीलें चलीं। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में पूर्व विधायक अमित जोगी को भी हत्या की साजिश का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की दोषसिद्धि और सजा के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अब इसी मामले में दोषी शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह बहुचर्चित केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जमानत का अर्थ दोषमुक्त होना नहीं है। अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।
राम अवतार जग्गी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित राजनीतिक आपराधिक मामलों में गिना जाता है। दो दशक से अधिक पुराने इस मामले में कई आरोपी, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और लगातार बदलते कानूनी घटनाक्रम इसे प्रदेश के सबसे चर्चित मुकदमों में शामिल करते हैं।










