महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिरा, दो-तिहाई बहुमत से दूर रही सरकार

Lok Sabha

नई दिल्ली। संविधान संशोधन से जुड़े तीनों विधेयकों पर लोकसभा (Lok Sabha) में हुई वोटिंग में सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। जरूरी दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के कारण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सके।

लोकसभा की कुल 543 सदस्यीय संख्या के हिसाब से किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कम से कम 362 वोट की आवश्यकता होती है। लेकिन मतदान के दौरान यह संख्या सरकार के पक्ष में नहीं पहुंच सकी।

मतविभाजन में कुल 528 सांसदों ने मतदान किया। बहुमत के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। इनमें से 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। इस तरह साधारण बहुमत मिलने के बावजूद संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन सरकार को नहीं मिल पाया।

वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सांसदों से ‘अंतरात्मा की आवाज’ सुनकर मतदान करने की अपील की थी। सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन को इस विधेयक का प्रमुख आधार बताया था।

गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा के दौरान कहा कि यह संशोधन महिलाओं के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर बिल का समर्थन करने की अपील की।

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान से जुड़े किसी भी संशोधन को व्यापक सहमति और पारदर्शिता के साथ लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भरोसे में लिए बिना ऐसे अहम बदलाव लाने की कोशिश लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

अंततः मतविभाजन में सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्ताव लोकसभा में पारित नहीं हो सके।

संविधान विधेयक गिरने के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। भारत ने देख लिया। INDIA ने रोक दिया। जय संविधान।’

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