अनूपपुर। जिले की जीवनदायिनी केवई नदी(kevai River)को बचाने के लिए अब आंदोलन आर-पार की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। नदी के संरक्षण को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे कोतमा के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को कोतमा एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अंतिम चेतावनी ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि 48 घंटे के भीतर प्रशासन ने निष्पक्ष जांच समिति गठित कर लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, तो 13 मई 2026 से नदी के बीच ‘जल सत्याग्रह’ शुरू किया जाएगा।
अवैध निर्माण और अवैध उत्खनन पर प्रशासन द्वारा संरक्षण का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि केवई नदी पर अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन साधे हुए है। उनका कहना है कि यह चुप्पी कहीं न कहीं रेत माफियाओं को संरक्षण देने का संकेत देती है। विशेष रूप से चंगेरी क्षेत्र में खुलेआम अवैध रेत उत्खनन जारी है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि केवई नदी पर एक अनिकट (छोटा बांध) का निर्माण पहले से हो चुका है, वहीं 9 नए अवैध बैराज प्रस्तावित हैं। यदि इन संरचनाओं को रोका नहीं गया, तो नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इन बैराजों के निर्माण से नदी का जल प्रवाह बाधित होगा, भूजल स्तर प्रभावित होगा और आसपास के गांवों में जल संकट गहरा सकता है।
जनसुनवाई में युवाओं ने लगाई थी कलेक्टर से गुहार
गौरतलब है कि इस पूरे मामले को लेकर लगभग 15 दिन पहले भी कलेक्टर कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर अब नागरिकों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि केवई नदी न केवल जल का प्रमुख स्रोत है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और आजीविका का भी आधार है।
अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों के चलते नदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जिससे मछुआरों, किसानों और आम नागरिकों पर सीधा असर पड़ रहा है।
आम जनमानस से समर्थन की अपील
आंदोलनकारियों ने इस मुद्दे को केवल एक संगठन या क्षेत्र तक सीमित न रखते हुए पूरे समाज की जिम्मेदारी बताया है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि केवई नदी को बचाने के लिए सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा। नदी संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने में सहयोग करें। अवैध रेत उत्खनन और निर्माण की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं।
प्रस्तावित ‘जल सत्याग्रह’ में शामिल होकर शांतिपूर्ण आंदोलन को मजबूती दें। पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को बचाने में भागीदारी निभाएं।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि 48 घंटे के बाद 13 मई वे शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी ‘जल सत्याग्रह’ शुरू करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में लोग नदी के भीतर खड़े होकर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि समय रहते कार्रवाई कर स्थिति को बिगड़ने से रोका जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अल्टीमेटम को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या केवई नदी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर आंदोलन की राह और भी तीव्र होती है।
13 मई से जल सत्याग्रह की चेतावनी
कोतमा नगर के युवक और आंदोलनकारी अनुज गौतम ने कहा कि प्रशासन के उदासीनता देखते हुए 13 मई से हम सब जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाएंगे, केवई बचाने के लिए हम मर मिटने को तैयार हैं।
केवई की दुर्दशा देख हम खुद को रोक नहीं पा रहे हैं, जनता के हित में हम पहले भी कार्य करते थे और अब भी जनता के हित और भविष्य को देखते हुए केवई नदी को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
अनूपपुर जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी छत्तीसगढ़ की पहाड़ियों से निकलकर कोतमा और जैतहरी ब्लॉक के लगभग 60 से 70 गांवों की प्यास बुझाती है।
इस नदी के तट पर बसे शिवलहरा, बदरा, कोड़ार और थानगांव जैसे 30 गांव सिंचाई और दैनिक जरूरतों के लिए सीधे तौर पर इसके जल पर ही निर्भर हैं, जबकि आसपास के 25 से ज्यादा गांवों का भू-जल स्तर भी इसी नदी से रिचार्ज होता है।
कोतमा, पसान और भालूमाड़ा जैसे प्रमुख कस्बों और कोयलांचल क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए यह जल का प्राथमिक स्रोत है, जिससे क्षेत्र की लगभग 15 से 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। ऐतिहासिक शिवलहरा गुफाओं को अपने आंचल में समेटे यह नदी न केवल अनूपपुर की पहचान है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की आजीविका का एकमात्र आधार भी है।











