लेंस डेस्क। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है। छात्रों के खिलाफ कोई FIR नहीं होगी। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों में शामिल 2700 से ज्यादा लोगों पर दर्ज FIR वापस नहीं ली जाएंगी। ये FIR उन लोगों के खिलाफ हैं जिन्होंने हिंसा या अन्य गंभीर अपराध किए।
प्रदर्शन और मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ 36 दिन तक विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी तीन मांगें थीं जिन्हें सरकार ने मान लिया। इनमें एक मांग यह भी थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। प्रदर्शन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हो गया था। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस पर बर्बरता के आरोपों वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई पुलिस अधिकारी जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है, तो उसे बेवजह नहीं बचाया जाना चाहिए। साथ ही यह भी नहीं होना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में कोई कुख्यात अपराधी बच निकले।कोर्ट प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायलों के आरोपों की जांच के लिए पूर्व जज की अध्यक्षता में SIT बनाने पर विचार कर सकता है। अदालत यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि पुलिस पर हमले छात्रों ने किए या भीड़ में घुसे शरारती तत्वों ने।
पिछली सुनवाई के निर्देश
28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से रोक दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 18 साल से कम उम्र वालों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो तो उन्हें रिहा कर दिया जाए। महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारों को नोटिस जारी किए गए थे। अदालत ने सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।
20 जुलाई का संसद मार्च
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
फेशियल रिकग्निशन पर याचिका
राज्यसभा सांसद एए रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकग्निशन और बायोमेट्रिक निगरानी के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है। याचिका में शांतिपूर्ण सभाओं में बिना भेदभाव के ऐसी निगरानी को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।








