यूपी में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने में सपा अब तक असफल क्यों है

नई दिल्ली। चंदा चोरी को लेकर संसद में गर्माये माहौल के बीच (UP) विधानसभा का सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। सत्र के शुरुआत में ही समाजवादी पार्टी के विधायक कार्ड बोर्ड लेकर विरोध करते नजर आए हैं। लेकिन फिर भी यूपी में चंदा चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी वो मूवमेंट बना पाने  में असमर्थ हो रही है जो करिश्मा संसद में राहुल गांधी ने मानसून सत्र  में कर दिखाया है और पहले पीएमओ घेरकर और अमित शाह का इस्तीफा मांगकर पूरी सरकार को घुटने पर ला दिया है।

सड़कों पर सन्नाटा

इस वक्त राहुल गांधी केंद्र सरकार के विरोध का केंद्रीय चेहरा बन गए है लेकिन अखिलेश यादव यूपी में ऐसा करने में नाकाम दिख रहे हैं, जबकि चुनाव नजदीक है। विधानसभा के  इस सत्र के बेहद आक्रामक होने की अपेक्षा थी और उम्मीद की थी कि सपा सड़कों पर भी नजर आएगी, गिरफ्तारियां होगी, धरने होंगे, मगर सन्नाटा है।

मुलायम की साइकिल अखिलेश की मर्सिडीज

पत्रकार अंशुमान त्रिपाठी कहते हैं कि यह कड़वा है मगर सच है कि नेतृत्व के स्तर पर अखिलेश को यूपी पचा नहीं पा रहा है यूपी को तेवर चाहिए, लड़ते दिखता हुआ नेता चाहिए,अखिलेश को विरोध का स्वर बनना था लेकिन वो नाकाम हो रहे हैं। यूपी को आक्रामक विपक्ष चाहिए जो विरोध के स्वर को तेज करे और सरकार को घेरे। अखिलेश फिलहाल वो करते नजर नहीं आ रहे। अंशुमान कहते हैं कि मर्सिडीज वैन में घूमने से विचारधारा का प्रचार नहीं होते मुलायम सिंह जी ने साइकिल से पूरे यूपी का भ्रमण किया और एक एक कार्यकर्ता का नाम जानते थे।

कांग्रेस भी कर रही है छात्र रैली

इस वक़्त उत्तर प्रदेश में सपा समेत समूचे विपक्ष को सोचना चाहिए कि ज़मीन पर उनकी तैयारियाँ कितनी मजबूत हैं। कांग्रेस जमीन पर दिख रही है, या फिर दिखने की कोशिश कर रही है। इलाहाबाद की आगामी छात्र रैली इसका प्रमाण है। लेकिन अखिलेश यादव ने मार्च के बाद से अब तक कोई बड़ी रैली नहीं की है। ठीक इसी वक्त के योगी आदित्यनाथ ने महज ४५ दिन में १०० से ज्यादा रैलियां कर ली हैं। पत्रकार अनंजय यादव कहते हैं कि  प्रदेश को ट्विटर और प्रेस कांफ्रेंस से नहीं जीता जा सकता यूपी, बिहार और एमपी भी नहीं है।

अयोध्या का कायाकल्प और सपा

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं समाजवादी बीजेपी के पिच पर उनके मुद्दों पर राजनीति करते नजर आ रहे है। अखिलेश यादव ने राम जन्मभूमि के कायाकल्प और सैफई में मंदिर बनाने की पहली ही घोषणा कर दी है। पार्टी इस वक्त न केवल यूपी विधानसभा में बल्कि संसद में श्री राम जन्मभूमि में चंदा चोरी को लेकर मुखर है। लेकिन मजेदार बात यह है कि आक्रामकता के बजाय सॉफ्ट प्ले कर रही है और तो और पार्टी के शीर्ष नेता इस विरोध प्रदर्शन में एकमत भी नजर नहीं आ रहे।

रामगोपाल और अन्य सांसदों की अलग राह

यह बात चौंकाने वाली थी कि राहुल गांधी और पप्पू यादव के बहुप्रचारित विरोध से रामगोपाल और राजीव राय जैसे सांसदों ने किनारा कर लिया जबकि खुद सपा के सांसद अवधेश प्रसाद भी उसमें शामिल थे वहीं धर्मेंद्र यादव और अखिलेश अलग लाइन पर रहे।
उधर लखनऊ में यह प्रदर्शन तख्तियां लेकर तस्वीरें खींचने तक सीमित रहा जबकि जरूरी यह था कि न केवल सदन में बल्कि सड़क पर बीजेपी को चंदा घोटाले, पेपर लीक कैसे मुद्दों पर घोर दिया जाए।

बीजेपी लाइन ऑफ पॉलिटिक्स

पत्रकार राजू मिश्रा कहते हैं कि समाजवादी पार्टी को बीजेपी की लाइन ऑफ पॉलिटिक्स के इस्तेमाल से परहेज करना होगा क्योंकि अब चुनाव नजदीक है। नितिन नबीन की रथयात्रा में नाचने वाले हनुमान को 51 हजार नगदी देने से वोट हासिल नहीं होगा वोट सामाजिक समरसता स्थापित करने के दावों और सड़कों पर ललकारने से होगा। जो बांकीपुर में जनसुराज ने किया और दतिया में कांग्रेस ने किया। मत भूलिए बीजेपी एक छोटा सा मौका भी नहीं छोड़ेगी। पप्पू यादव के भगवा कपड़े का कैसे इस्तेमाल किया गया यह सबके सामने

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