रायपुर। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता सत्यनारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को एक पत्र लिखकर शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) को नर्सरी और प्री-प्राइमरी कक्षाओं में लागू करने की मांग की है।
पत्र में सत्यनारायण शर्मा ने कहा है कि हाल ही में राज्य में RTE के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश केवल कक्षा पहली से करने का फैसला लिया गया है। पहले नर्सरी स्तर पर भी RTE लागू था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया। इससे गरीब परिवारों के बच्चे शुरू से ही अच्छी शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

उन्होंने बताया कि RTE अधिनियम 2009 में प्री-प्राइमरी शिक्षा को शामिल करने की बात है। कई अन्य राज्यों में नर्सरी से ही गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश मिलता है। छत्तीसगढ़ में ऐसा न होने से अमीर और गरीब बच्चों के बीच शिक्षा में असमानता बढ़ेगी। गरीब बच्चे सीधे कक्षा पहली में आएंगे, जबकि अमीर बच्चे नर्सरी से पढ़ाई शुरू कर चुके होंगे। इससे गरीब बच्चों का आधार कमजोर रहेगा।
सत्यनारायण शर्मा ने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द नर्सरी से पीपी-2 (प्री-प्राइमरी) तक RTE लागू करे। स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने से पहले गरीब परिवारों के बच्चों को प्रवेश मिले। इससे सभी बच्चों को समान अवसर मिलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी।
क्या है स्कूल शिक्षा विभाग का आदेश
गौरतलब है कि बीते दिन छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नया निर्देश जारी किया है, जिसमें राज्य के सभी निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत प्रवेश की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब RTE के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को केवल पहली कक्षा में ही दाखिला मिल सकेगा। यह नियम आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रभावी हो जाएगा।
पहले की व्यवस्था में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) वाले परिवारों के बच्चे नर्सरी, किंडरगार्टन (KG-1) या प्री-प्राइमरी स्तर पर निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश पाते थे। कई निजी संस्थान इन बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में ही जगह देते थे। लेकिन नए नियमों से इन प्री-स्कूल स्तर की कक्षाओं में RTE के तहत दाखिले की सुविधा समाप्त कर दी गई है।
विभाग ने इस बदलाव को RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) के प्रावधानों के आधार पर लागू किया है और इसे प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है।







