नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस के समय अचानक तीखी नोंकझोंक और शोर-शराबा शुरू हो गया। जैसे ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने डोकलाम में चीन की कथित घुसपैठ का जिक्र शुरू किया, सदन का वातावरण गरमा उठा। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी सीट से उठ खड़े हुए और राहुल गांधी के दावों का कड़ा विरोध जताया। करीब 45 मिनट तक यह हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को बीच में रोकना पड़ा।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक मैगजीन में प्रकाशित पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला दिया। उनका कहना था कि सरकार इस किताब को छपने नहीं दे रही है, ताकि डोकलाम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य छिपे रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चाई को दबाने की कोशिश हो रही है। पहले उन्होंने कारवां मैगजीन की किताब का जिक्र किया, फिर नरवणे की किताब पर बात की।
इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने गंभीर इल्ज़ाम बिना सबूत के नहीं लगाए जा सकते। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कारवां की किताब प्रकाशित नहीं हुई है। इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी बीच में टोकते हुए पूछा कि जो किताब छपी ही नहीं है, उसका सदन में संदर्भ कैसे दिया जा सकता है।
अमित शाह ने कहा कि कारवां की रिपोर्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। साथ ही उन्होंने बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के बयान का हवाला दिया और स्पष्ट किया कि तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष की देशभक्ति पर कोई सवाल नहीं उठाया था, जबकि राहुल गांधी ने उन पर ऐसा आरोप लगाया था।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया। उन्होंने याद दिलाया कि सदन के नियमों के अनुसार किसी अप्रकाशित किताब, रिपोर्ट या अखबार का हवाला नहीं दिया जा सकता। स्पीकर ने कहा कि अगर किताब छप भी जाए, तब भी उसे पढ़कर या उद्धृत करके सदन में इस्तेमाल करना मना है, और इस बारे में सदस्यों को पहले ही सूचित किया जा चुका है।
इन आपत्तियों के बावजूद राहुल गांधी अपने रुख पर अड़े रहे। उन्होंने मैगजीन की रिपोर्ट को पूरी तरह विश्वसनीय बताते हुए कहा कि अगर सरकार किसी किताब को छपने से रोक रही है, तो उसमें लिखी बातें सच ही होंगी। उन्होंने सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पारदर्शिता न बरतने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि पहले किताब कोट करने से रोका गया, फिर मैगजीन को, अब भारत-चीन संबंधों पर भी बोलने से मना किया जा रहा है। स्पीकर ने जवाब दिया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में चीन का कोई जिक्र नहीं है और सदन में देश की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी का दायित्व है। राहुल गांधी ने पलटकर पूछा कि क्या चीन या पाकिस्तान पर चर्चा करना वर्जित है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नियमों के अनुसार बोलने की हिदायत दी और कहा कि अगर नहीं बोलना चाहते तो अगले सदस्य को मौका दिया जाएगा।
इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के चरित्र का जिक्र करने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने उन्हें रोककर अखिलेश यादव को बोलने का मौका दे दिया। अमित शाह ने दोबारा कहा कि तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष की देशभक्ति पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
बाद में अखिलेश यादव ने चीन के मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए कहा कि अगर कोई सुझाव देशहित में है, तो विपक्ष के नेता को उसे रखने की इजाजत मिलनी चाहिए। उन्होंने राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव का उदाहरण देते हुए चीन से सतर्क रहने की बात कही। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सदन सुनने के लिए तैयार है, लेकिन मनमानी से नहीं चलेगा। केसी वेणुगोपाल ने भी नियमों का हवाला दिया और तेजस्वी सूर्या पर कांग्रेस पर आरोप लगाने का दावा किया, जिस पर अमित शाह ने कहा कि यह बात सही नहीं है। स्पीकर ने हस्तक्षेप कर कहा कि विपक्ष के नेता को बोलने दें और सदन में वकील की तरह पैरवी नहीं की जाती।
अंत में हंगामे के बीच स्पीकर ने अखिलेश यादव को बोलने के लिए आवाज दी लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण सदन की कार्रवाई दोपहर तीन बजे के लिए स्थागित करनी पड़ी।











