स्मार्ट मीटर के बाद अब बिजली व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री? अभी बिल से परेशान हैं तो आगे लग सकता है ‘तगड़ा करंट’

Smart Meter

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं, जरा सावधान! अगर Smart Meter के बाद आपका बिजली बिल पहले ही जेब पर भारी पड़ रहा है, तो आने वाला बदलाव आपको और बड़ा झटका दे सकता है। आज बिल बढ़ने की चिंता है, कल कहीं बिजली की दर बढ़ने का डर न सताने लगे! क्योंकि बिजली बिल में पिछले सालभर से लगातार झटके देने के बाद सरकार अब एक ऐसा फैसला करने जा रही है, जिसका असर आप पर भयानक तौर पर पड़ने वाला है।

छत्तीसगढ़ की बिजली व्यवस्था में निजी कंपनी की एंट्री का रास्ता खुल रहा है। स्मार्ट मीटरिंग के बाद टाटा पावर ने बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया है। छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग (CSERC) को 15 जून को टाटा पॉवर ने वह आवेदन दिया और आयोग ने उसे रजिस्टर कर लिया है। 15 जुलाई को इसकी सुनवाई भी हुई।

बिजली को निजी हाथों में देने की यह वीडियो स्टोरी देखिए…

द लेंस के यू ट्यूब चैनल में वीडियो रिपोर्ट देखिए।

कंपनी ने रायपुर जिले के रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों के भौगोलिक रूप से जुड़े क्षेत्र में वितरण लाइसेंस मांगा है। आवेदन 15 जून 2026 को किया गया है और आयोग के रिकॉर्ड में यह मामला अभी प्रक्रिया में है।

मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इन क्षेत्रों में राजधानी रायपुर के साथ-साथ बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्र भी आते हैं। यानी निजी कंपनी अगर वितरण लाइसेंस हासिल करती है और इन क्षेत्रों के बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ती है, तो इसका सबसे बड़ा असर सरकारी कंपनी CSPDCL पर पड़ सकता है, जो अभी पूरे प्रदेश में बिजली वितरण की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रही है।

आयोग के 15 जुलाई की सुनवाई में क्याक्या हुआ?

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि टाटा पावर का आवेदन विद्युत अधिनियम, 2003 और CSERC (लाइसेंस) विनियमन, 2004 के तहत वितरण लाइसेंस देने के मामले में सभी पहलुओं में पूरा है। इसके बाद पिटीशन को रजिस्टर कर लिया गया।

आयोग ने टाटा पावर को CSERC के लाइसेंस नियमों के FORM-4 के तहत सार्वजनिक सूचना का ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया है। यानी लाइसेंस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक आपत्तियों/दावों की प्रक्रिया की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

कंपनी की ओर से प्रस्तावित लाइसेंस क्षेत्र में जमीन और अन्य परिसंपत्तियों के अधिग्रहण से जुड़ा नोट भी आयोग के सामने रखा गया था। हालांकि आयोग ने कहा कि यह दस्तावेज नोटरीकृत हलफनामे के साथ नहीं था, इसलिए उसे उस समय रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा सकता। कंपनी को इसे विधिवत नोटरीकृत हलफनामे के साथ जमा करने को कहा गया है।

आयोग ने टाटा पावर को विद्युत अधिनियम की धारा 15(2)(ii) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी प्रतिष्ठानों से एनओसी हासिल करने का भी निर्देश दिया है। यह अगली सुनवाई से पहले पूरा करना होगा।

आयोग ने अभी टाटा पावर को अंतिम वितरण लाइसेंस नहीं दिया है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी के अनुपालन संबंधी हलफनामे मिलने के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। यानी प्रक्रिया आगे बढ़ी है, लेकिन अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।

…तो सरकारी कंपनी कैसे संभालेगी घरेलू उपभोक्ताओं का बोझ?

बिजली वितरण व्यवस्था में घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणियों के बीच क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। विद्युत अधिनियम, 2003 में भी वितरण और ओपन एक्सेस व्यवस्था के संदर्भ में क्रॉस-सब्सिडी को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है।

यही वजह है कि टाटा पावर के आवेदन को केवल एक निजी कंपनी को बिजली बांटने का लाइसेंस देने का मामला मानना पर्याप्त नहीं होगा।

छत्तीसगढ़ रिटायर्ड पॉवर इंजीनियर्स एंड ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीएन सिंह ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर आम बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। पीएन सिंह के मुताबिक, यह सिर्फ किसी एक इलाके में बिजली वितरण का लाइसेंस देने का मामला नहीं है, बल्कि बिजली व्यवस्था को धीरे-धीरे निजी हाथों में देने की तैयारी के तौर पर इसे देखा जाना चाहिए।

पीएन सिंह कर तर्क है कि अगर निजी कंपनी बड़े और ज्यादा राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को अपने साथ ले जाती है, तो सरकारी वितरण कंपनी के सामने घरेलू उपभोक्ताओं का बोझ बढ़ सकता है।

ज्यादा बिजली खपत करने वाले और ज्यादा राजस्व देने वाले औद्योगिक उपभोक्ता सरकारी कंपनी CSPDCL से निकलकर निजी कंपनी के पास चले गए, तो CSPDCL के पास घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए राजस्व का आधार बहुत कम होगा।

निजी कंपनी के लिए उद्योग सबसे बड़ा बाजार

टाटा पावर ने जिन चार तहसीलों के लिए लाइसेंस मांगा है, वे रायपुर जिले के महत्वपूर्ण औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र हैं। ऐसे इलाकों में बड़ी मात्रा में बिजली खपत करने वाले उद्योग और वाणिज्यिक उपभोक्ता मौजूद हैं।

निजी कंपनी के लिए ऐसे उपभोक्ता सबसे आकर्षक हो सकते हैं, क्योंकि उनकी बिजली खपत घरेलू कनेक्शन की तुलना में कई गुना अधिक होती है।

अगर निजी कंपनी बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को CSPDCL की तुलना में कम प्रभावी दर या बेहतर व्यावसायिक शर्तों पर बिजली उपलब्ध कराने में सफल होती है, तो उद्योगों का झुकाव निजी वितरण कंपनी की ओर हो सकता है।

इसका सीधा मतलब होगा कि जिस औद्योगिक बिजली से सरकारी वितरण कंपनी को बड़ा राजस्व मिलता है, उसका एक हिस्सा निजी कंपनी के पास जाने लगेगा।

एक इलाके में निजी कंपनी को बड़े औद्योगिक उपभोक्ता मिल जाते हैं और CSPDCL के पास मुख्य रूप से घरेलू, छोटे व्यवसाय और अपेक्षाकृत कम राजस्व वाले उपभोक्ता रह जाते हैं तो सरकारी कंपनी पहले की तरह घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध नहीं करा पाएगी।

ऐसे में सरकार को CSPDCL की भरपाई के लिए ज्यादा सब्सिडी देनी होगी। और अगर सरकारी कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ा तो भविष्य में बिजली दरों में बढ़ोतरी का रास्ता खुलेगा। इसका मतलब होगा कि घरेलु उपभोक्ताओं  को महंगी बिजली मिलेगी।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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