नई दिल्ली। गौतम अडानी हमारे लिए सिर्फ एक ठेकेदार हैं, और कांग्रेस शासित कर्नाटक में इस अरबपति व्यवसायी को प्रोजेक्ट मिलने से पार्टी के उनके बारे में विचार नहीं बदलते। कर्नाटक के गृहमंत्री Priyank Kharge ने सोमवार को यह बात कही। यह बयान उस दिन आया जब एक दिन पहले अडानी ने बेंगलुरु में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की थी।
यह बयान भाजपा के डबल स्टैंडर्ड के आरोपों के बीच आया। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अडानी को क्रोनी कैपिटलिज्म का चेहरा बताती है, लेकिन साथ ही उनके समूह के साथ कारोबार भी करती है।
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने पत्रकारों से कहा, कि हमारे लिए अडानी सिर्फ एक ठेकेदार हैं। उन्होंने कहा कि अडानी समूह को कोई प्रोजेक्ट मिलने से देश के सबसे अमीर लोगों में से एक के बारे में कांग्रेस के विचार नहीं बदलते। खड़गे ने आगे कहा, ‘हमारी राय है कि केंद्र सरकार अडानी और अंबानी की गुलाम है।’
गृह मंत्री खरगे का ये बयान उस दिन आया जब एक दिन पहले अडानी ने बेंगलुरु में मुख्यमंत्री निवास पर शिवकुमार से संक्षिप्त मुलाकात की थी।
जानकारी मिल रही है कि अडानी बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर जाने आए थे और उन्होंने शिवकुमार से भी पूछा कि क्या दोनों मिल सकते हैं। इस मुलाकात से अवगत एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी क्योंकि अडानी के पास समय था और मुख्यमंत्री घर पर थे।’
गौतम अडानी के नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय समूह ने हेब्बल से सेंट्रल सिल्क बोर्ड तक 17 किमी के प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली (L1) लगाई है। उनकी बोली 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, जो राज्य के अनुमान 17,698 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है।
खरगे ने कहा कि अडानी कुछ प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाले (L1) हैं। ये कर्नाटक सरकार के लिए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हैं। हमने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया है। कोई भी L1 बन सकता है।
उन्होंने कहा, ‘अगर अडानी कानूनी तरीके से टेंडर जीतते हैं तो ठीक है।’ उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा, जो टनल प्रोजेक्ट का जोरदार विरोध कर रही है। उन्होंने पूछा कि अब अडानी इस विवादित प्रोजेक्ट के ठेकेदार बनने वाले हैं तो भाजपा का रुख क्या है।
खड़गे ने कहा, ‘अब भाजपा क्या कहेगी? क्या टनल रोड प्रोजेक्ट बनना चाहिए या नहीं, क्योंकि अडानी को कॉन्ट्रैक्ट मिल गया है। उनके ही रिश्तेदार को मिला है।’
डीके शिवकुमार ने इस मुलाकात को ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया और कहा कि किसी खास मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अडानी समूह लंबे समय से मुलाकात की मांग कर रहा था, और अब यह मुलाकात हो गई। कांग्रेस अडानी समूह पर अपनी राजनीतिक स्थिति नहीं बदली है, लेकिन यह सरकारी फैसलों या टेंडर प्रक्रिया में बाधा नहीं बन सकती।
खरगे ने जोर दिया कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी थी और अगर नियम पालन हुए हैं तो सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं।उन्होंने कहा, ‘हमारा काम काम करवाना है। अंबानी हो, अडानी हो या कोई और, इससे फर्क नहीं पड़ता। अगर टेंडर प्रक्रिया सही रही तो हम क्या करें?’









