नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बजट सत्र के बीच संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से18 अप्रैल तक बुलाने की घोषणा की है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन किया जाना है। जिस पर विपक्षी दलों ने ऐतराज जताया है। ऐतराज की मुख्य वजह पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव है। विपक्ष का कहना है यह चुनाव को प्रभावित करने की बीजेपी की कोशिश है।
इस संशोधन के जरिए मोदी सरकार 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जनगणना और नए परिसीमन से जोड़े बिना जल्द लागू करने की तैयारी है। साथ ही परिसीमन अधिनियम में बदलाव कर लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने और उनमें से करीब 273 महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है।
सरकार का दावा है कि इससे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू हो सकेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 16 और 26 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इस पर चर्चा का प्रस्ताव दिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ क्षेत्रीय दलों जैसे बीजेडी, वाईएसआरसीपी आदि से बात की, लेकिन कांग्रेस के साथ औपचारिक बैठक नहीं हुई।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम सितंबर 2023 के विशेष सत्र में पास हुआ था, लेकिन उसमें आरक्षण को आगामी जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। विपक्ष अब कह रहा है कि सरकार ने उस वक्त भी देरी की और अब चुनावी मौसम में नैरेटिव मैनेजमेंट कर रही है।
सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष को भी इस महिला सशक्तिकरण के कदम का समर्थन करना चाहिए, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी लाभ का प्रयास मान रहा है।
विशेष सत्र के दौरान संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इस मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता और आगे की रणनीति पर नजरें टिकी हैं।
विपक्ष ने कहा- चुनावी चाल और MCC का उल्लंघन
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस विशेष सत्र को चुनावी स्टंट” और “राजनीतिक फायदे की कोशिश बताया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, सरकार 30 महीने तक इस कानून पर सोई रही। अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी) के ऐन बीच विशेष सत्र बुलाकर दोबारा श्रेय लेना चाहती है। यह बंगाल और तमिलनाडु चुनावों (23 और 29 अप्रैल) को प्रभावित करने की साफ कोशिश है और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन है।
जयराम रमेश ने आगे कहा कि सरकार ने 2023 के विशेष सत्र में कानून पास करते समय जनगणना-परिसीमन की शर्त लगाई थी, लेकिन अब अचानक 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन का प्रस्ताव ला रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे छोटे राज्यों (दक्षिण, उत्तर-पूर्व और पश्चिम) को नुकसान होगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से 120 हो सकती हैं, जबकि केरल की 20 से बढ़कर 30 के आसपास ही रहेंगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि सरकार ‘बुली’ की तरह काम कर रही है और महिला आरक्षण का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। उन्होंने 29 अप्रैल यानी चुनाव बाद सभी दलों की बैठक की मांग की थी, जिसे सरकार ने ठुकरा दिया। राहुल गांधी और खड़गे अब विपक्षी दलों के साथ रणनीति बनाने वाले हैं।
अन्य विपक्षी दल भी विरोध में हैं। समाजवादी पार्टी और राजद ने OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा की मांग की है और टाइमिंग को बंगाल चुनाव को निशाना बताया।











