लेंस डेस्क। Maharashtra local body elections: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में सत्ता के लिए अप्रत्याशित समीकरण बन रहे हैं। जिसको लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की पार्टी विद डिफरेंस वाली विचारधारा पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि बीजेपी, कांग्रेस और AIMIM के बीच गठबंधन किसी को पच नहीं रहा है। जिसको लेकर सीएम देवेंद्र फडणवीस को सफाई तक देनी पड़ गई है।
महाराष्ट्र के अकोला जिले में स्थित अकोट नगर परिषद में हाल के चुनावों का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है। पहले अंबरनाथ में कांग्रेस के साथ सहयोग करके विवाद झेल चुकी बीजेपी ने अब यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पार्षदों का समर्थन लेकर प्रशासन की कमान संभाल ली है।
अकोट नगर परिषद की कुल 35 सीटों में से 33 पर हालिया चुनाव संपन्न हुए। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन उसे केवल 11 सीटें ही मिलीं, जो बहुमत से काफी कम थीं। AIMIM ने 5 सीटें हासिल कीं, जबकि कांग्रेस को 6, प्रहार जनशक्ति पार्टी को 3, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 2, अजित पवार गुट की एनसीपी को 2, वंचित बहुजन अघाड़ी को 2, शिंदे गुट की शिवसेना को 1 और शरद पवार गुट की एनसीपी को 1 सीट मिली।
बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए बीजेपी ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम से एक नया गठजोड़ बनाया। इसमें AIMIM के पार्षदों के अलावा दोनों शिवसेना गुटों (शिंदे और ठाकरे), दोनों एनसीपी गुटों (अजित और शरद पवार) तथा बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी के सदस्यों को शामिल किया गया। इस समर्थन से गठबंधन की ताकत 25 पार्षदों तक पहुंच गई। बीजेपी की माया धुले नगराध्यक्ष पद पर चुनी गईं, जबकि रवि ठाकुर को समूह नेता बनाया गया। यह गठजोड़ जिला प्रशासन के पास औपचारिक रूप से पंजीकृत भी कराया गया।
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, AIMIM के पांच में से चार पार्षदों ने इस मंच का साथ दिया, जिससे ओवैसी की पार्टी को बड़ा झटका लगा। हालांकि, AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने स्पष्ट किया कि पार्टी की विचारधारा बीजेपी से पूरी तरह अलग है और ऐसे किसी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अंबरनाथ में क्या हुआ था?
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में हाल के निकाय चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर सत्ता पर कब्जा कर लिया, जिससे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
चुनाव परिणामों के अनुसार, 60 सदस्यीय परिषद में शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसे 27 सीटें मिलीं, लेकिन बहुमत से चार कदम दूर रह गई। बीजेपी को 14, कांग्रेस को 12 और अजित पवार गुट की एनसीपी को 4 सीटें हासिल हुईं, जबकि दो निर्दलीय सदस्य भी चुने गए।
इन आंकड़ों के आधार पर बीजेपी ने कांग्रेस व एनसीपी के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम से गठबंधन बनाया, जिससे कुल 32 सदस्यों का समर्थन मिला और बहुमत हासिल हो गया। इस गठबंधन से बीजेपी की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल ने नगराध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि शिंदे गुट की मनीषा वालेकर को हार का सामना करना पड़ा।
यह गठबंधन शिंदे गुट के लिए बड़ा झटका साबित हुआ, क्योंकि अंबरनाथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह क्षेत्र माना जाता है और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे यहां से सांसद हैं। शिंदे गुट के विधायक बालाजी किनीकर ने इसे ‘अवसरवादी और अनैतिक समझौता’ करार दिया, साथ ही बीजेपी पर तंज कसा कि जो पार्टी ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात करती है, वही सत्ता के लिए कांग्रेस से हाथ मिला रही है।
सीएम फडणवीस और कांग्रेस ने जताई नाराजगी
बीजेपी की ओर से इस गठबंधन का बचाव करते हुए उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि महायुति के तहत शिंदे गुट से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। उनका दावा है कि यह कदम स्थानीय स्तर पर विकास और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए उठाया गया।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इस अप्रत्याशित समझौते पर कड़ी कार्रवाई की। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पार्टी से निलंबित कर दिया और सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कदम उठाए। पार्टी का कहना है कि यह गठबंधन बिना प्रदेश नेतृत्व की अनुमति के किया गया, जो गंभीर अनुशासनहीनता है। ब्लॉक कमेटी की कार्यकारिणी भी भंग कर दी गई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस गठबंधन पर नाराजगी जताई और इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों से किसी स्तर पर समझौता नहीं कर सकती और स्थानीय नेताओं से इस फैसले को वापस लेने के निर्देश दिए। पार्टी के अंदर माना जा रहा है कि ऐसे कदमों से वैचारिक स्थिरता और छवि प्रभावित होती है।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने भी इस पर हमला बोला। उनके प्रवक्ता ने इसे राजनीति का अनोखा खेल बताया, जहां सत्ता के लिए पुराने मतभेद भुला दिए गए। कुल मिलाकर, यह स्थानीय स्तर का समझौता राज्य की बड़ी राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है, खासकर जब महायुति गठबंधन राज्य सरकार चला रहा हो।











