Lens Exclusive: नरेंद्र मोदी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे स्टडी सेंटर के गवर्निंग काउंसिल में घासीदास के कुलपति का नाम

January 9, 2026 6:42 PM

Lens Exclusive

-पीएमओ ने दिया सीबीआई जांच का आदेश
-कुलपति ने किया फर्जी संस्था से एमओयू, बदले में लिया पद
-घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को फर्जी संस्था के शोध में किया शामिल
-हिसार की फर्जी संस्था से ले लिया नेल्सन मंडेला के नाम पर एवार्ड

रायपुर । बिलासपुर के घासीदास सेंट्रल विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक चकवाल पीएम मोदी के नाम पर चलाई जा रही जिस सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज की गर्वनिंग काउंसिल के सदस्य हैं, उस संस्था के फर्जीवाड़े की जांच मोदी पीएमओ के आदेश पर  सीबीआई कर रही है।


कंगना रनौत के नाम का भी किया इस्तेमाल
कुलपति आलोक चकवाल द्वारा बहुप्रचारित इस संस्था ने कंगना रनौत जैसी शख्सियत को भी झांसे में रखकर उनका इस्तेमाल किया था। गजब यह हुआ कि कुलपति आलोक चकवाल ने इस फर्जी संस्था और घासीदास विश्वद्यालय के बीच शैक्षणिक आदान प्रदान के लिए एमओयू करा लिया। कुलपति आलोक चकवाल साहित्यकार मनोज रूपड़ा के अपमान को लेकर चर्चा में आए हैं।

अलीगढ़ से है नरेंद्र मोदी स्टडीज सेंटर का कनेक्शन

इस फर्जीवाड़े के बारे में बताया जाता है कि यूपी अलीगढ़ में पिछले काफी समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर स्टडी और रिसर्च सेंटर चल रहा था। जिसे जसीम अहमद नाम का शख्स चला रहा था जसीम के खिलाफ पीएमओ की तरफ से दी गई शिकायत के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की है। बीते 24 अक्टूबर को जसीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई क्योंकि वह बिना किसी परमिशन के नरेंद्र मोदी अध्ययन केंद्र व नमो केंद्र चला रहा था। जसीम ने इस सेंटर को सही दिखाने के लिए फिल्म अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत का भी इस्तेमाल किया।

नवंबर माह में घासीदास के साथ किया एमओयू

जसीम ने इस फर्जी रिसर्च सेंटर की साइट पर भाजपा सांसद कंगना रनौत को यह दावा करते हुए दिखाया था कि उन्होंने इसके लिए पीएम मोदी के भाषणों का एक कलेक्शन तैयार किया है। गजब यह रहा कि घासीदास विश्वविद्यालय और  सेंटर ऑफ नरेंद्र मोदी स्टडीज के एमओयू पर आधिकारिक रूप से विश्वविधालय के रजिस्ट्रार और नमो केंद्र के प्रबंध ट्रस्टी प्रोफेसर जसीम मोहम्मद ने 7 नवंबर, 2024 को हस्ताक्षर किए।

हिसार की संस्था से यूके का एवार्ड

बात यहीं नहीं रुकती। कुलपति आलोक चकवाल का नाम कोई फर्जी अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और एवार्ड्स को लेकर भी चर्चा में रहा है। कुलपति आलोक चकवाल ने एशियन काउंसिल फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च से नेल्सन मंडेला एक्सीलेंस एवार्ड 2025 हासिल किया। गजब यह है कि खुद को यूनाइटेड किंगडम से रजिस्टर्ड बताने वाली यह संस्था हरियाणा के हिसार में है और एजुकेशनल काउंसिलिंग करने का दावा करती है। पुरस्कारों और तस्वीरों के शौकीन कुलपति ने इस तरह के कई एवार्ड हासिल किए हैं।

लगातार विवादों में रहे कुलपति ने विश्वद्यालय में शुरू किया मंदिर निर्माण

आलोक चकवाल के कार्यकाल में घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एनएसएस केम्प में जबरन नमाज पढ़ाए जाने और कैंपस में मंदिर बनाए जाने का विवाद बेहद चर्चा में रहा है। जिससे निपटने में कुलपति असफल रहे। दरअसल पिछले वर्ष एक एनएसएस कैंप में जिसमें गुरु घासीदास विश्विद्यालय के 159 छात्र शामिल हुए थे और 30 मार्च को ईद के दिन एनएसएस कैंप में छात्रों से कुरान की कुछ आयात पढ़ाई है।

छात्रों ने इस मामले की लिखित शिकायत थाने में की थी, जिसके बाद पुलिस ने प्रोफेसर को उठा लिया। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. दिलीप झा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें एनएसएस समन्वयक पद से हटा दिया । इस घटना के बाद विश्वविद्यालय के कैम्पस में बिना अनुमति के मंदिर का निर्माण शुरू हो गया जिसको लेकर जमकर बवाल खड़ा हुआ और जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

कुलपति आलोक चकवाल से जब इन आरोपों को लेकर जवाब लेने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा। जैसे ही जवाब प्राप्त होगा खबर को अपडेट किया जाएगा।

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