तिरुवनंतपुरम। केरल राज्य सरकार सांस्कृतिक विभाग और केरल चलचित्र अकादमी द्वारा आयोजित 30वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFK, KERALA FILM FESTIVAL) का समापन विवादों और राजनीतिक टकराव के बीच हो गया। 12 से 19 दिसंबर तक चले इस महोत्सव में 82 देशों की 206 फिल्मों की स्क्रीनिंग का प्लान था, लेकिन केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 19 फिल्मों पर पाबंदी लगा दी। समापन समारोह में मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि महोत्सव को बाधित करने की कोशिशें की गईं, लेकिन केरल ने इसका मुकाबला किया। उन्होंने केंद्र की पाबंदियों को हास्यास्पद बताया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण करार दिया।
महोत्सव के दौरान सबसे बड़ा विवाद सेंसर छूट न मिलने वाली फिल्मों को लेकर हुआ। सामान्यतः फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए सेंसर सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती, लेकिन गैर-सर्टिफाइड फिल्मों के लिए आईएंडबी मंत्रालय से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। आयोजकों ने इवेंट से 10 दिन पहले सभी फिल्मों की जानकारी और सिनॉप्सिस मंत्रालय को भेजी थी, लेकिन 15 दिसंबर को जब आधा महोत्सव बीत चुका था, 19 फिल्मों को ब्लॉक कर दिया गया।
इनमें चार फलिस्तीनी फिल्में शामिल थीं ‘पैलेस्टीन 36’, ‘यस!’, ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन गज़ा’ और ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’। इसके अलावा स्पैनिश फिल्म ‘बीफ’, सोवियत क्लासिक ‘बैटलशिप पोतेमकिन’ (1925), हिंदी फिल्म ‘संतोष’ और अन्य जैसी मूवीज पर रोक लगी। ‘बीफ’ को लेकर मुख्यमंत्री विजयन ने केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि मंत्रालय ने शीर्षक को गलत समझा, क्योंकि फिल्म स्पैनिश हिप-हॉप संस्कृति पर आधारित है, जहां ‘बीफ’ का मतलब संघर्ष या विद्रोह होता है, न कि भोजन से जुड़ा।
केरल सरकार ने शुरू में केंद्र की पाबंदी को नजरअंदाज करते हुए सभी फिल्मों को दिखाने का फैसला लिया। अकादमी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर बुधवार से सभी फिल्में यथावत दिखाई गईं। हालांकि विदेश मंत्रालय (एमईए) ने छह फिल्मों पर कड़ी आपत्ति जताई और चेतावनी दी कि इन्हें दिखाने पर कानूनी कार्रवाई होगी, क्योंकि ये देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं हैं। इनमें ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, ‘यस!’, ‘ईगल्स ऑफ द रिपब्लिक’, ‘ए पोएट’, ‘फ्लेम्स’ और ‘क्लैश’ शामिल थीं।
आयोजक और अकादमी चेयरपर्सन रेसुल पूकुट्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एमईए की चेतावनी के बाद तीन फिल्मों- ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, ‘यस!’ और ‘क्लैश’- को नहीं दिखाने का फैसला लिया गया। लेकिन बाकी तीन- ‘ईगल्स ऑफ द रिपब्लिक’, ‘ए पोएट’ और ‘फ्लेम्स’- पहले ही स्क्रीन हो चुकी थीं। पूकुट्टी ने स्वीकार किया कि कुछ विदेशी फिल्म निर्माताओं को वीजा नहीं मिलने से भी आलोचना हुई, जो भारत की विदेश नीति से जुड़ा मुद्दा था।
इन सभी विवादों ने महोत्सव की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाए। वाइस-चेयरपर्सन कुक्कू परमेश्वरन ने मीडिया को बताया कि 187 फिल्मों को अनुमति के लिए भेजा गया था लेकिन 19 पर रोक से कई स्क्रीनिंग रद्द करनी पड़ीं जिससे दर्शकों को निराशा हुई। मुख्यमंत्री विजयन ने समापन में फिलिस्तीनी फिल्मों पर रोक को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि केंद्र का रुख स्पष्ट हो गया है। उन्होंने जोर दिया कि शुरू में किसी फिल्म को छूट नहीं मिली, लेकिन बाद में बैचों में अनुमति दी गई, हालांकि कुछ वेन्यू बदलने पड़े।
समापन समारोह में पुरस्कारों की घोषणा हुई। जापानी फिल्म ‘टू सीजंस, टू स्ट्रेंजर्स’ ने सुवर्ण चकोरम (सर्वश्रेष्ठ फिल्म) जीता, जबकि अर्जेंटीना के निर्देशक कैरिना पियाजा और लूसिया ब्रासेलिस को राजथा चकोरम (सर्वश्रेष्ठ निर्देशक) मिला। अन्य विजेताओं में ‘शैडोबॉक्स’ और ‘इफ ऑन अ विंटर्स नाइट’ शामिल रहीं। आयोजकों ने कहा कि छह फिल्मों को छोड़कर बाकी सभी को अंततः क्लीयरेंस मिल गया। यह महोत्सव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक हस्तक्षेप और सांस्कृतिक विविधता के मुद्दों पर बहस छेड़ गया जो आने वाले समय में और गहरा सकता है।











