नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
नफ़रत के इस दौर में जब सोशल मीडिया पर देश की राजधानी दिल्ली में नार्थ ईस्ट के लोगों के साथ हुई भद्दगी की ख़बरें ट्रेंड कर रही है मणिपुर की फ़िल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी की फ़िल्म ने विश्वप्रसिद्ध बाफ़्टा पुरस्कार जीता है।
मुख्यमंत्री युम्नाम खेमचंद सिंह ने लंदन में आयोजित 79वें ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (BAFTA) पुरस्कार 2026 में मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘बोंग’ को सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म का पुरस्कार मिलने पर प्रशंसित फिल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी को बधाई दी और इस उपलब्धि को राज्य और राष्ट्र दोनों के लिए गौरव का क्षण बताया।

‘बोंग’ ने ‘ज़ूटोपिया 2’, ‘लिलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को हराकर यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया।सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री ने देवी को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि फिल्म की सफलता उनकी असाधारण रचनात्मकता और समर्पण को दर्शाती है और वैश्विक मंच पर मणिपुरी कला और संस्कृति का स्तर बढ़ाती है। उन्होंने मणिपुर की जनता की ओर से भी उनकी सराहना की और उनकी निरंतर सफलता की कामना की।
बाफ्टा समारोह में लक्ष्मीप्रिया देवी ने अपने भाषण में अपने गृह राज्य मणिपुर की मौजूदा स्थिति की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बोंग को एक ऐसी फिल्म बताया जो भारत के एक बेहद अशांत, उपेक्षित और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्र, मणिपुर पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि वह इस मंच का उपयोग क्षेत्र में शांति की वापसी के लिए हार्दिक अपील करने के लिए करना चाहती हैं। देवी ने प्रार्थना की कि फिल्म में अभिनय कर रहे बाल कलाकारों सहित सभी विस्थापित बच्चे अपनी खुशी, अपनी मासूमियत और अपने सपनों को फिर से प्राप्त कर सकें।
एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी द्वारा निर्मित, बोंग एक ऐसे युवा लड़के की कहानी है जिसकी मासूम यात्रा एक परिवर्तनकारी बदलाव की ओर ले जाती है। फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया सहित कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराहना मिल चुकी है, और बाफ्टा में इसकी जीत वैश्विक मंच पर क्षेत्रीय भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर है।
लक्ष्मीप्रिया देवी के भाषण और फिल्म को मिली पहचान ने मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं के बारे में बातचीत शुरू कर दी है, जिससे पूर्वोत्तर की उन आवाजों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित हुआ है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की खबरों में कम प्रतिनिधित्व मिलता है।











