संसद की एस्टीमेट कमेटी में बृजमोहन अग्रवाल बोले – छत्तीसगढ़ में भारी मशीनरी और मेंटेनेंस हब की संभावनाएं

Brijmohan Agrawal

नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल (Brijmohan Agrawal) मंगलवार को नई दिल्ली में संसद की प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) की उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में ‘देश में भारी उपकरण उत्पादन क्षमता की समीक्षा’ विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान भारी उद्योग मंत्रालय और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के उत्पादन, तकनीकी क्षमता विस्तार और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खनिज, ऊर्जा, खनन और इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की मजबूत स्थिति को देखते हुए राज्य में भारी मशीनरी और खनन उपकरणों के आधुनिक विनिर्माण एवं मेंटेनेंस हब विकसित किए जा सकते हैं।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में भारी इंजीनियरिंग की भूमिका

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 और आधुनिक तकनीक की जरूरतों को देखते हुए छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी कौशल प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाने चाहिए। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और उद्योगों को कुशल तकनीकी मानव संसाधन भी उपलब्ध हो सकेगा।

बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के विजन को साकार करने में भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके मुताबिक यह क्षेत्र खनन, बिजली, निर्माण, ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे क्षेत्रों को आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराकर देश के औद्योगिक विकास को गति देता है।

बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास जताया कि प्राक्कलन समिति की ओर से तैयार किए जाने वाले नीतिगत सुझाव भारत को भारी उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

5 साल में खनन मशीनरी का निर्यात 274 फीसदी बढ़ा

बृजमोहन अग्रवाल ने बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारी उपकरण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अर्थमूविंग, निर्माण और खनन मशीनरी का उत्पादन वर्ष 2020-21 में 29,021 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 80,750 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान उत्पादन में 178.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं इस क्षेत्र के निर्यात में 274.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

इसी तरह मशीन टूल्स और डाई-मोल्ड क्षेत्र का उत्पादन 6,602 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,286 करोड़ रुपये हो गया है। यह क्षेत्र विनिर्माण उद्योग के लिए आधारभूत या ‘मदर इंडस्ट्री’ के तौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारी विद्युत उपकरणों के क्षेत्र में भी ट्रांसफॉर्मर, बॉयलर और टर्बाइन जैसे उत्पादों के निर्माण में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक इन क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता में 19.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

IIT और प्रमुख संस्थानों के सहयोग से स्वदेशी तकनीक पर जोर

सांसद ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय की ‘भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता संवर्धन योजना’ के पहले और दूसरे चरण के तहत IITs, IISc, CMTI, ARAI और BHEL जैसे संस्थानों के सहयोग से रिसर्च सेंटर, कॉमन इंजीनियरिंग फैसिलिटी सेंटर और उद्योग त्वरक स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि इन प्रयासों के तहत 25 से अधिक स्वदेशी तकनीकों का विकास और व्यावसायीकरण किया गया है, जबकि 70 से अधिक बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) दाखिल किए गए हैं।

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