पत्रकार रवि नायर के घर गुजरात पुलिस का छापा, अडानी समूह ने दर्ज कराया था मामला

नई दिल्ली। गुजरात पुलिस ने स्वतंत्र पत्रकार Ravi Nair के दिल्ली स्थित आवास पर छापा मारकर उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लैपटॉप, कंप्यूटर वगैरह जब्त कर लिए।

पुलिस ने यह कार्रवाई अदानी समूह द्वारा रवि नायर के खिलाफ दर्ज किए गए मामले में अहमदाबाद की मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर की। वारंट में पुलिस को नायर के परिसर की तलाशी लेने और जरूरत पड़ने पर उपकरणों को सुरक्षित तरीके से जब्त करने की अनुमति दी गई थी।

हालांकि, पुलिस ने नायर के बेटे और उनकी सहयोगी साची हेगड़े के उपकरण भी जब्त कर लिए। हेगड़े उस समय नायर के दिल्ली स्थित घर पर मौजूद थीं। पुलिस ने उनका लैपटॉप और आईपैड अपने कब्जे में ले लिया। न तो हेगड़े और न ही नायर के बेटे का इस मामले में आरोपी के तौर पर नाम है।यह कार्रवाई गुजरात हाईकोर्ट द्वारा पत्रकार रवि नायर के खिलाफ कथित जालसाजी के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करने के करीब एक सप्ताह बाद हुई है। यह एफआईआर अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड की शिकायत पर दर्ज की गई थी।मामला पिछले साल प्रकाशित द वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर से जुड़ा है।खबर में आरोप लगाया गया था कि भारतीय जीवन बीमा निगम ने केंद्र सरकार के निर्देश पर अडानी समूह की कंपनियों में निवेश किया था।

न्यून आउटलेट द वायर के अनुसार जब गुजरात पुलिस ने नायर के घर पर कार्रवाई की, उस समय वह केरल में थे। उनकी सहयोगी साची हेगड़े संयोग से दिल्ली स्थित उनके घर पर मौजूद थीं। पुलिस ने वहां से नायर के बेटे और हेगड़े के उपकरण भी जब्त कर लिए।

पुलिस ने जब्त किए गए पांचों उपकरणों के लिए कोई हैश वैल्यू उपलब्ध नहीं कराई। किसी डिजिटल डिवाइस की हैश वैल्यू उसके डेटा की एक तरह की डिजिटल पहचान होती है, जिसका इस्तेमाल बाद में यह जांचने के लिए किया जा सकता है कि डिवाइस में मौजूद डेटा के साथ छेड़छाड़ हुई है या नहीं।

यह कार्रवाई पत्रकारों के जब्त उपकरणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। 7 नवंबर 2023 को फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों के संबंध में दिशानिर्देश बनाने को कहा था। अदालत ने यह भी कहा था कि पुलिस या किसी जांच एजेंसी को पत्रकार के फोन, लैपटॉप या दूसरे डिजिटल उपकरणों को जब्त करके उनमें मौजूद डेटा तक मनमाने ढंग से पहुंचने की खुली छूट नहीं होनी चाहिए।

नायर के खिलाफ एफआईआर 31 मई 2026 को अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड की ओर से उसके एक कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर हुई थी।

अडानी के कर्मचारी दुष्यंत जोशी ने अपनी पुलिस शिकायत में आरोप लगाया कि नायर ने यह कहते हुए झूठी और मनगढ़ंत जानकारी लिखी और पोस्ट की कि एलआईसी ने अडानी समूह की कंपनियों में 3.9 अरब डॉलर का निवेश किया है।

जोशी ने आरोप लगाया कि ‘न तो एलआईसी और न ही वित्तीय सेवा विभाग’ ने इस मामले से संबंधित कोई दस्तावेज तैयार, जारी, आदान-प्रदान या प्रसारित किया था। शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जो झूठे, जाली और मनगढ़ंत थे और उन्हें असली दस्तावेजों के तौर पर इस्तेमाल किया गया

24 अक्टूबर 2025 को द वॉशिंगटन पोस्ट ने पत्रकार प्रशांत वर्मा और रवि नायर की सह-लेखक वाली एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें कहा गया था कि भारत सरकार और एलआईसी ने सार्वजनिक धन में से करीब 3.9 अरब डॉलर अडानी समूह की कंपनियों में निवेश करने का निर्देश दिया था।

इसके अगले दिन एलआईसी ने एक पोस्ट के जरिए द वॉशिंगटन पोस्ट की खबर को खारिज किया था. एलआईसी ने कहा था कि उसके सभी निवेश ‘ईमानदारी और उचित जांच-पड़ताल’ के साथ किए जाते हैं.नायर ने गुजरात हाईकोर्ट में अपनी याचिका में दलील दी थी कि एलआईसी द्वारा खबर का खंडन कर देना अपने आप में उन्हें एफआईआर में लगाए गए अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं बनाता।

उन्होंने यह भी कहा था कि खबर में बताए गए तथ्यों का एलआईसी द्वारा खंडन किए जाने से उन दस्तावेजों को जाली नहीं माना जा सकता, जिनके आधार पर द वॉशिंगटन पोस्ट में रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी।नायर का कहना था कि इसलिए उन्हें कथित जालसाजी के अपराध के लिए अभियोजित नहीं किया जा सकता।

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