रायपुर। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रवक्ताओं की एक बैठक में 15 सौ करोड़ रुपयों की कथित वसूली वाले वायरल वीडियो में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर एक डॉक्टर यह कहते सुने गए कि ‘सब भाईसाहब को फंसाने के लिए किया जा रहा है।’
इस डॉक्टर की यह टिप्पणी पार्टी के प्रवक्ताओं की बैठक में की गई थी, लेकिन कोई भी इस पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन, नाम न छापने की शर्त पर कम से कम दो प्रवक्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि उस चिकित्सक ने ऐसा कहा था। बताया गया कि ये चिकित्सक ऐलोपैथी डॉक्टर नहीं हैं।
भाजपा में भाई साहब का मतलब हर कोई जानता है कि कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए ही बैठकों में ऐसे संबोधन का प्रयोग होता है।
उस बैठक में शामिल सभी लोग यह समझ गए थे कि चिकित्सक किनके लिए यह बात कह रहे थे। लेकिन दिलचस्प यह है कि पुलिस तक इस मामले को पहुंचे दो महीने से ऊपर हो गए हैं, लेकिन अब तक कुछ छोटे प्यादों को पकड़ने के अलावा पुलिस न इस बात का पता लगा पाई है कि यह वीडियो क्या सिर्फ एक कंसल्टेंसी फर्म के कुछ लड़कों की शरारत भर थी या इस वीडियो को तैयार करने के पीछे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को बदनाम करने की साजिश थी। और अगर यह साजिश थी तो क्या इतने छोटे कर्मचारी इतने बड़े नेताओं के खिलाफ साजिश करने लगे थे। या इस साजिश के पीछे कुछ ऐसे बड़े लोग थे, जिनके हितों के आड़े नितिन नबीन आ गए थे।
इस सवाल का जवाब पाने के लिए हमने भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और वर्तमान उपाध्यक्ष नंदन जैन से संपर्क करने की कोशिश की। दरअसल, भाजपा सूत्र और पुलिस के सूत्र भी बताते हैं कि जिन 4 युवकों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, वे कभी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सोशल मीडिया पेज हैंडल करते थे। और बताते हैं कि नंदन जैन के व्यावसायिक प्रतिष्ठान में भी उनका दफ्तर चलता था। हम नंदन जैन से समझना चाहते थे कि क्या ये युवक उनके संपर्क में थे और ऐसा वीडियो बनाने में उन युवकों की क्या दिलचस्पी हो सकती थी, लेकिन नंदन जैन से संपर्क नहीं हो सका।
प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय के करीबी माने जाने वाले नंदन जैन अभी देश के आम बजट के प्रचार प्रसार को लेकर भाजपा द्वारा बनाई गई एक कमेटी में भी शामिल किए गए हैं।
पार्टी के भीतर जो चर्चाएं हैं उनके मुताबिक किसी भी स्तर पर कोई भी यह मानने को तैयार नहीं है कि वह वीडियो जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और 15 सौ करोड़ रुपए की राशि का जिक्र है, एक छोटी-मोटी एजेंसी के कुछ युवकों का काम होगा।
बताते हैं कि इस एजेंसी को चलाने वाले युवक बीजेपी परिवार से ही आते हैं। इनमें से एक बेमेतरा के वरिष्ठ भाजपा नेता का पुत्र है। जिसका नाम अब तक एफआईआर में नहीं आया है। पुलिस के सूत्र कहते हैं कि इसे बचाने के लिए प्रदेश के एक बड़े दिग्गज ने फोन किया था। यह जानते हुए भी कि इस वीडियो को लेकर खुद दिल्ली से बड़े नेताओं ने अत्यंत नाराजगी के साथ सीधे स्थानीय पुलिस अफसरों को फोन किया था।
पता तो यह भी चला है कि रायपुर से एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने भाजपा के उस प्रदेश के दिग्गज को इस बात से अवगत भी करा दिया था कि इस मामले में उन्हीं की पार्टी का हाई कमान अत्यंत नाराज है। फिर भी किसी तरह अब तक भाजपा नेता के बेटे को बचा लिया गया है।
अब उस टिप्पणी की बात जो एक गैर एलोपैथिक चिकित्सक ने प्रवक्ताओं की बैठक में कही थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले में ‘भाई साहब’ को बदनाम करने की कोशिशें हो रही थीं।
बीजेपी की राजनीति के प्रेक्षक कहते हैं कि यह वीडियो क्लिप सीधे-सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के खिलाफ थी। इसका मतलब अगर साजिश थी तो इन्हें बदनाम करने की साजिश थी। तो फिर यह सवाल कैसे उठा कि ‘भाई साहब’ को बदनाम करने की कोशिशें हो रहीं हैं।
यह प्रवक्ता सत्तारुढ़ भाजपा में इतना प्रभाव रखते हैं कि सीधे अफसरों को निर्देश दिया करते थे। मंत्रालय सूत्र बताते हैं कि एक वरिष्ठ अफसर ने तो इनका निर्देश मानने से इंकार कर दिया था और वे कुछ दिनों की छुट्टी पर भी चली गई थीं। ऐसे में इनके प्रभाव को देखते हुए इनकी इस टिप्पणी को पार्टी में नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी और सरकार ने बाकायदा मामले की पुलिस रिपोर्ट करवाने के लिए एक विधायक को चुना – रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा को।

जिस मामले की रिपोर्ट सत्तारूढ़ पार्टी के कोई विधायक करवा रहे हों क्या उसे भी दफन किया सकता है ?
क्या यह मामला सत्तारूढ़ भाजपा के गले की हड्डी बन चुका है जिसमें कार्रवाई हुई तो पार्टी संगठन के दिग्गज चेहरे ही बेनकाब नहीं होंगे बल्कि मामले के तार कथित तौर पर आबकारी की वसूली तक जा सकते हैं जिस पर अंकुश लगाने की कोशिश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तब के छत्तीसगढ़ प्रभारी नितिन नबीन ने की थी ?
पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पूरी पार्टी में सबको खबर है कि जब नितिन नबीन आबकारी वसूली पर अंकुश लगा रहे थे तब कौन कौन उनकी शिकायतें लेकर दिल्ली में पार्टी हाईकमान तक पहुंचा था। लेकिन पार्टी हाई कमान भी ऐसे लोगों की गतिविधियों से अवगत था।दिल्ली में श्री नबीन के खिलाफ शिकायतों को रद्दी की टोकरी में फेंका गया और बाद में तो वे राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बन गए।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम ना देने के आग्रह के साथ कहा कि कुछ अरसा पहले संगठन में एक फेरबदल को नितिन नबीन के अंकुश के रूप में ही देखना चाहिए लेकिन अभी पार्टी नहीं चाहती कि किसी भी तरह के बड़े एक्शन से पार्टी की इमेज को धक्का पहुंचे।
सवाल यही उठ रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ में सत्ता की राजनीति में उच्च स्तर पर साजिशें हो रहीं हैं। और अगर हो रहीं हैं तो क्या पुलिस उन्हें बेनकाब नहीं कर पा रही है या पार्टी की बदनामी की डर से पुलिस के भी हाथ बांध दिए गए हैं।
इन सब सवालों का जवाब पाने के लिए द लेंस ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से संपर्क किया। श्री सिंह देव ने फोन उठाया, पर हमारे सवाल की पहली लाइन – रायपुर के सिविल लाइन थाने में पुरंदर मिश्रा की एक शिकायत दर्ज हुई… सुनते ही उन्होंने फोन काट दिया।
इस मामले में रायपुर उत्तर के भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने इतना ही कहा, ‘पुलिस की जांच चल रही है।’
रायपुर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचाने वाले इस वीडियो और उससे जुड़ी साजिशों की जांच कब पूरी होगी, पुलिस क्या कभी प्रभावशाली लोगों को बेनकाब कर पाएगी या ये मामला कुछ ऐसे छोटे-मोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी तक सिमट कर रह जाएगा, जिन्हें पिछले दो महीने से उनकी एजेंसी ‘रणनीति’ ने वेतन तक नहीं दिया है?
यह भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ में FIR नंबर 667/25 में ऐसा क्या है कि रायपुर में सरकार से लेकर दिल्ली तक भाजपा हिल गई?









