लेंस डेस्क। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपने पारंपरिक गढ़ कोलाथुर सीट पर तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के उम्मीदवार वीएस बाबू से हार गए। यह नतीजा न केवल स्टालिन के लिए व्यक्तिगत झटका है, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वीएस बाबू को करीब 64,000 से ज्यादा वोट मिले, जबकि स्टालिन उनसे लगभग 8,000 से 9,000 वोटों के अंतर से पीछे रह गए। कोलाथुर स्टालिन का गढ़ माना जाता था, जहां उन्होंने 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत हासिल की थी। 2021 में उन्होंने भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार टीवीके की लहर ने सब बदल दिया।
वीएस बाबू कौन हैं?
वीएस बाबू पहले डीएमके से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2006 में पुरसावल्कम सीट से डीएमके के टिकट पर जीत हासिल की थी और उत्तर चेन्नई जिला सचिव के रूप में भी काम किया। फरवरी 2026 में उन्होंने टीवीके जॉइन किया। उनकी जीत को डीएमके के घर में सेंध लगाने के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य में टीवीके की धमाकेदार एंट्री
राज्य भर में टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया है। नवगठित पार्टी (अभिनेता विजय के नेतृत्व में) 107 से 110 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि डीएमके 58-59 सीटों पर और एआईएडीएमके करीब 45-51 सीटों पर आगे है। कांग्रेस, पीएमके, बीजेपी और अन्य छोटी पार्टियां बहुत कम सीटों पर सिमट गई हैं।
यह नतीजा तमिलनाडु की पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों (डीएमके और एआईएडीएमके) की दबदबे वाली राजनीति को चुनौती दे रहा है। टीवीके ने युवा रोजगार, नशा मुक्ति और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुद्दों पर जोर दिया, जिसने खासकर नए मतदाताओं को आकर्षित किया।
राजनीतिक विश्लेषक इसे तमिलनाडु राजनीति में ‘विजय इफेक्ट’ और एंटी-इनकंबेंसी का नतीजा बता रहे हैं।











