नई दिल्ली। तमिलनाडु (Tamilnadu) में हाल ही में हुए चुनावों के परिणाम में तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा बनने के बाद एआईएडीएमके ने डीएमके से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा है। हालांकि द हिंदू के अनुसार डीएमके नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
सूत्रों ने कहा कि पार्टी विपक्ष में बैठने के लिए दृढ़ संकल्पित है क्योंकि वह जनता के जनादेश के विरुद्ध नहीं जाना चाहती। कई तेजी से हुए घटनाक्रमों के बाद, एआईएडीएमके ने पहले ही दोहराया था कि वह तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) द्वारा गठित होने वाली संभावित सरकार का समर्थन नहीं करेगी।
इसके पहले द लेंस से बात करते हुए तमिलनाडु के वरिष्ठ पत्रकार के वी लक्ष्मणा ने डीएमके और एआईएडीएमके के किसी संभावित एलायंस को कोरी अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां 70 साल से एक दूसरे से लड़ रही हैं। इस तरह के गठबंधन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
लक्ष्मणा ने कहा कि ऐसा कोई गठबंधन अगर बनता भी तो जनता का गुस्सा इन दोनों पार्टियों को सहना पड़ता। हालांकि उनका यह भी कहना था कि 2029 लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में नए किस्म का गठबंधन देखने को मिल सकता है।
इससे पहले दिन में, राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने 5 मई से तमिलनाडु की 16वीं विधानसभा को भंग कर दिया, जब टीवीके प्रमुख विजय ने लोक भवन में उनसे मुलाकात कर नई सरकार बनाने का अपना दावा पेश किया।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की 50 विधानसभा सीटों पर पुनर्निर्वाचन की मांग की, जहां उसका दावा है कि जीत का अंतर एसआईआर के दौरान हटाए गए कुल वोटों से कम है, और सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के पक्ष में अनुकूल परिणाम सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों में जानबूझकर हेरफेर किया जा रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं से समझौता किया जा रहा है।
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