हिमंता बिस्वा सरमा चुने गए विधायक दल के नेता, 12 को लेंगे असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ

गुवाहाटी। असम में एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा (Assam CM) के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने जा रही है। रविवार को हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर आधिकारिक मुहर लग गई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा ने हिमंता बिस्वा सरमा के नाम का ऐलान किया।

हिमंता बिस्वा सरमा 12 मई को सुबह 11 बजे लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी ने 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 82 सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ी सफलता हासिल की थी। इस जीत को उत्तर-पूर्व में बीजेपी की मजबूत पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।

असम बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कहा कि पार्टी जल्द ही राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। उन्होंने कहा कि 12 मई का शपथ ग्रहण समारोह ऐतिहासिक होगा और प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हिमंता 102 विधायकों के समर्थन के साथ शपथ लेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस बार असम विधानसभा चुनाव पूरी तरह हिमंता बिस्वा सरमा के चेहरे पर लड़ा गया। उनकी रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ वोटों में तब्दील होती नजर आई।

चुनाव प्रचार के दौरान हिमंता ने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने इसे असमी संस्कृति, भाषा और परंपरा के लिए खतरा बताया। साथ ही दावा किया कि हर हफ्ते 35 से 40 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे ने हिंदू वोटरों के बीच बीजेपी की पकड़ और मजबूत की।

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक हिमंता ने खुद को एक मजबूत और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया। वहीं सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का भी चुनाव में असर दिखा।

अरुनोदोई योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता, चाय बागान की महिला श्रमिकों को 5000 रुपए की सहायता और गरीब परिवारों तक नकद लाभ पहुंचाने जैसी योजनाओं ने महिला वोटरों को बीजेपी के पक्ष में लामबंद किया। इसके अलावा 15 लाख घर और 2 लाख नौकरियों के वादे ने भी जनता को प्रभावित किया।

लगातार 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद बीजेपी के खिलाफ राज्य में कोई बड़ा एंटी-इनकम्बेंसी माहौल नहीं था। कुछ सीटों पर स्थानीय विधायकों को लेकर नाराजगी जरूर दिखी, लेकिन उसका चुनावी नतीजों पर बड़ा असर नहीं पड़ा।

बीजेपी की इस जीत को उत्तर-पूर्व में पार्टी के राजनीतिक विस्तार और हिमंता बिस्वा सरमा की बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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