UNGA में एर्दोगन के भाषण पर इजराइल और ट्रंप के भाषण पर क्यूबा प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट

लेंस डेस्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में मंगलवार को दो अलग-अलग मौकों पर प्रतिनिधिमंडलों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हॉल छोड़ दिया। पहला वॉकआउट तुर्की राष्ट्रपति रेजेप तैयप एर्दोगन के भाषण के दौरान इजराइली प्रतिनिधिमंडल ने किया, जबकि दूसरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के दौरान क्यूबा प्रतिनिधिमंडल ने।

तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगन ने गाजा में जारी युद्ध की कड़ी निंदा करते हुए इजराइल पर ‘जनसंहार मानसिकता’ और ‘सरकारी आतंकवाद’ का आरोप लगाया। उन्होंने गाजा को ‘हमारे समय का सबसे अमानवीय और शर्मनाक कंसंट्रेशन कैंप’ बताया।

एर्दोगन ने कहा, ‘हम ऐसी मानसिकता का सामना कर रहे हैं जो हत्या से कभी संतुष्ट नहीं होती। इंसानियत, दया और विवेक रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस पर आंखें नहीं मूंद सकता।’ उन्होंने इजराइल पर दबाव बढ़ाने और फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की अपील भी की।

उनके इन शब्दों के दौरान इजराइली प्रतिनिधिमंडल हॉल से बाहर चला गया। वहीं फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल ने एर्दोगन के भाषण का समर्थन करते हुए तालियां बजाईं।

ट्रंप का क्यूबा पर हमला और प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट

इसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा को निशाना बनाया। उन्होंने क्यूबा को ‘absolutely failed state’ (पूरी तरह विफल राज्य) बताया और कहा, “यह पहले से कहीं ज्यादा फेल हो रहा है और गिर जाएगा। अमेरिका में साम्यवाद कभी नहीं आएगा, लेकिन क्यूबा में आजादी जरूर आएगी।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी सरकार क्यूबा में बुनियादी राजनीतिक बदलाव चाहती है और वे अमेरिकी सीमाओं के पास किसी विदेशी विरोधी ताकत को जगह नहीं देंगे।

इन टिप्पणियों के तुरंत बाद क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अपने स्थान से उठकर हॉल से बाहर चले गए। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने बाद में सोशल मीडिया पर ट्रंप के बयानों को “झूठ और बदनामी” करार दिया।

दोनों घटनाओं का महत्व

संयुक्त राष्ट्र महासभा में वॉकआउट विरोध का पारंपरिक तरीका माना जाता है। इस बार एक ही दिन में दो बड़े प्रतिनिधिमंडलों का हॉल छोड़ना वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एर्दोगन का भाषण गाजा युद्ध और फिलिस्तीन मुद्दे पर केंद्रित था, जबकि ट्रंप ने क्यूबा को लेकर अपनी कड़ी नीति दोहराई।

दोनों घटनाएं संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान हुईं, जहां विश्व के कई नेता मौजूद थे।

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