नई दिल्ली। वेदांता ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप (JP Group) की संपत्तियों के लिए अडानी ग्रुप द्वारा पेश किए गए रिजॉल्यूशन प्लान पर स्टे रोक लगाने की मांग की है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले हफ्ते नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने अडानी ग्रुप के रिजॉल्यूशन प्लान पर स्टे देने से इनकार कर दिया था।
वेदांता का कहना है कि उसका रिजॉल्यूशन प्लान अडानी ग्रुप से बेहतर वैल्यू दे रहा था। क्रेडिटर्स की समिति (CoC) ने उसका प्ला खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई आने वाले कुछ हफ्तों में होने की उम्मीद है।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने 29 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि वेदांता को पहले जयपी एसेट्स का सफल बोलीदाता घोषित किया गया था, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया।
उन्होंने लिखा, ‘हाल ही में CoC ने IBC प्रक्रिया के तहत एसेट को पब्लिक नीलामी के लिए रखा। कई मजबूत बोलीदाता शामिल हुए। अचानक जयप्रकाश गौर जी की भावनाएं मेरे मन में लौट आईं। एक-एक करके सभी बोलीदाता बाहर हो गए। अंत में हमें सार्वजनिक रूप से हाईएस्ट बिडर घोषित किया गया। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। हमें लिखित में सूचना दी गई कि हमने जीत हासिल कर ली है। लेकिन जीवन इतना सरल नहीं होता। कुछ दिनों बाद फैसला बदल दिया गया।’
जेपी ग्रुप पर ₹57,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज था। IBC के तहत जून 2025 में बोली आमंत्रित की गई थी।
अडानी ग्रुप ने ₹14,535 करोड़ का ऑफर दिया था। इसमें अपफ्रंट कैश ₹6,000 करोड़ था और बाकी राशि 2-3 साल में चुकाने की योजना थी।
वेदांता का शुरुआती बिड कुल ₹17,000 करोड़ था। इसमें अपफ्रंट कैश लगभग ₹4,000 करोड़ थी और बाकी राशि 6 साल में देनी थी।
क्रेडिटर्स ने अडानी का प्लान इसलिए चुना क्योंकि अपफ्रंट पेमेंट ज्यादा थी। और बाकी राशि भी जल्दी 2-3 साल में मिल रही थी।
नवंबर 2025 में वेदांता ने अपना बिड संशोधित कर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया। संशोधित बिड में कुल ₹16,726 करोड़ की राशि रखी। अपफ्रंट कैश ₹6,563 करोड़ और बाकी राशि 5 साल में देनी थी।
वेदांता ने जनवरी 2026 में National Company Law Appellate Tribunal की इलाहाबाद बेंच में याचिका दायर की। उसने कहा कि उसका बिड हाईएस्ट था और Net Present Value (NPV) भी बेहतर था, फिर भी क्रेडिटर्स ने कम वैल्यू वाला प्लान मंजूर कर लिया।17 मार्च 2026 को NCLAT ने वेदांता की याचिका खारिज कर अडानी ग्रुप के प्लान को मंजूरी दे दी।
वेदांता ने NCLAT में अपील की, लेकिन NCLAT ने पिछले हफ्ते अंतरिम स्टे देने से इनकार कर दिया। हालांकि, NCLAT ने मुख्य याचिका पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है और 14 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है।
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