रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर पर, क्या ₹100 का आंकड़ा पार कर जाएगा ?

fall in rupee

US Dollar vs Indian Rupee : साल 2026 में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है। फिलहाल रुपया 97 के करीब पहुंच चुका है और इस साल अब तक 7% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो जल्द ही यह 100 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है।

क्यों लगातार कमजोर हो रहा है रुपया?

रुपये की गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे महत्वपूर्ण वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकालना भी रुपया कमजोर करने का एक प्रमुख कारण है।

गिरावट का ट्रेंड

जनवरी-फरवरी: गिरावट धीमी रही, सिर्फ 1% से थोड़ी ज्यादा।
2 मार्च से 21 मई: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद गिरावट तेज हुई – 5% से ज्यादा।
2026 में कुल गिरावट: 7.04%

यह 2022 के बाद रुपए की सबसे बड़ी गिरावट है।
2022: 11% गिरावट
2025: 4.9% गिरावट
2024: 2.9% गिरावट

आम आदमी पर क्या असर?

रुपये के कमजोर होने से आयातित सामान (खासकर पेट्रोल, डीजल और कई जरूरी उत्पाद) महंगे हो सकते हैं। इससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ने की आशंका है।16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ₹100 प्रति डॉलर का आंकड़ा मन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने कहा ‘100 बस एक नंबर है। रुपए को खुद गिरने दो। रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा भंडार खाली करके रुपए को बचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।’ पनगढ़िया का तर्क है कि तेल की कीमतें कुछ समय ऊंची रह सकती हैं, लेकिन जैसे ही आयात बिल कम होगा, विदेशी निवेशक सस्ते रुपए को देखकर भारत में निवेश करने आएंगे तब रुपया खुद मजबूत हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में महंगाई नियंत्रण में है, इसलिए रुपए के कमजोर होने से होने वाली थोड़ी बहुत महंगाई अर्थव्यवस्था आसानी से झेल लेगी।

एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और विदेशी निवेश नहीं लौटा, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। नवीनतम जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और आर्थिक समाचारों पर नजर बनाए रखें। आर्थिक मामलों में निवेश या फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह अवश्य लें।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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