नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को पूरी तरह बदलकर एक नया कानून ला रही है, जिसका नाम रखा गया है… ‘विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) विधेयक-2025’। मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच यह बिल पेश किया गया और ध्वनिमत से पास भी हो गया।
इस बदलाव से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे महात्मा गांधी का अपमान बता रही है और राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला है। राहुल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी जी को दो चीजों से साफ-साफ नफरत है। गांधी जी के विचारों से और गरीबों के हक से। मनरेगा गांधी के ग्राम स्वराज का जीता-जागता रूप है, जो कोविड के मुश्किल दौर में भी ग्रामीणों की ढाल बना रहा। राहुल का आरोप है कि पिछले दस साल से मोदी सरकार इस योजना को लगातार कमजोर करती आई है और अब इसका नाम-ओ-निशान मिटाने पर तुली है।
कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि ‘राम’ नाम से डरना या परहेज करना गांधीवादी होना नहीं है। गांधी जी खुद रामराज्य की बात करते थे और ग्राम स्वराज व रामराज्य उनके लिए एक-दूसरे के पूरक थे, विरोधी नहीं। थरूर ने नए नाम पर विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और अप्रत्यक्ष रूप से अपनी पार्टी को भी संदेश दिया कि राम के नाम पर रक्षात्मक होने की जरूरत नहीं।
संसद से सड़क तक हंगामा
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मनरेगा योजना से जुड़े नए विधेयक पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महात्मा गांधी उनके निजी परिवार का हिस्सा नहीं थे, लेकिन उनके लिए परिवार जैसे ही थे और पूरे राष्ट्र के लिए भी यही भावना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रस्तावित कानून को पहले संसद की स्थायी समिति के पास विचार के लिए भेजा जाना चाहिए। किसी की व्यक्तिगत जिद या पक्षपात की वजह से कोई विधेयक जल्दबाजी में सदन में लाकर पारित नहीं कराना चाहिए।
दूसरी ओर पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने इस पूरे मामले को संसदीय परंपराओं से अलग हटकर बताते हुए आपत्ति जताई। उन्होंने विशेष रूप से विधेयकों के शीर्षक में अंग्रेजी लिपि में हिंदी शब्दों के बढ़ते उपयोग पर विरोध दर्ज किया। उनका मानना है कि इससे गैर-हिंदी बोलने वाले लोगों को कानूनों की पहचान करने, उन्हें सही उच्चारित करने और समझने में काफी परेशानी होगी।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि व्यक्ति तब सबसे अधिक कमजोर पड़ जाता है जब वह सांप्रदायिकता और जातिवाद की राह पर चलने लगता है। केवल योजनाओं के नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होता, बल्कि मौजूदा कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
मनरेगा से संबंधित विवाद पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भारतीय जनता पार्टी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले और देश का कुशल नेतृत्व करने वाले महात्मा गांधी तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे असंख्य नेताओं से गहरी नाराजगी है। इस नए विधेयक के जरिए गांधीजी का नाम हटाकर उसके स्थान पर ‘जी राम जी‘ जोड़ने से सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है।
विपक्ष की आलोचनाओं के जवाब में भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने पलटवार किया। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि विपक्ष यह समझने में असमर्थ है कि विधेयक का नाम हिंदी में क्यों रखा गया। असल में उनकी मुख्य आपत्ति नाम में शामिल ‘राम‘ शब्द से है, जबकि सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
बदलावा के पीछे मोदी सरकार का है ये दावा
बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नई योजना में अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का कानूनी रोजगार गारंटी मिलेगा (पहले 100 दिन थे)। इसके लिए केंद्र सरकार 95,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करेगी और कुल बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रखा गया है।
- पिछड़ी और सबसे कम विकसित पंचायतों को प्राथमिकता मिलेगी, उनके लिए ज्यादा काम और फंड।
- दिव्यांग, महिलाएं, बुजुर्ग, एससी-एसटी समुदाय को विशेष प्राथमिकता।
- गांवों का संपूर्ण विकास पर जोर, सिर्फ मजदूरी नहीं।
- कृषि कार्यों में मजदूरों की कमी की पुरानी शिकायत को भी दूर करने की कोशिश।
शिवराज सिंह चौहान ने पुरानी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ही कभी जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था, तब किसी ने नेहरू जी का अपमान नहीं माना। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गांधी जी के अंतिम शब्द “हे राम” थे और राम राज्य का मतलब हर तरह के दुख-तकलीफ से मुक्ति है। उनके मुताबिक यह नया कानून गांधी जी की भावना और रामराज्य की दिशा में ठोस कदम है।










