US-INDIA ट्रेड डील: क्‍या अमेरिका के फायदे के लिए? भारत का किसान नुकसान में क्‍यों? 

February 7, 2026 2:30 PM
US-India Trade Deal

लेंस डेस्‍क। अमेरिका और भारत के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील ने दोनों देशों में हलचल मचा दी है। इस समझौते को अमेरिका जहां ‘अमेरिका फर्स्ट’ की बड़ी जीत बता रहा है, वहीं भारत में इसे किसानों के हितों पर हमला बताकर विरोध हो रहा है। जबकि पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल इसे देश हित में बता रहे हैं। वहीं भारत में किसान संगठन विरोध में हैं और विपक्षी नेता राहुल गांधी इसे मोदी सरकार की ‘समर्पण’ की नीति का नतीजा मान रहे हैं। डील के बाद अमेरिका भारत में किन कृषि उत्पादों को बेचने की तैयारी कर रहा है।

अमेरिकी कृषि विभाग की सचिव ब्रुक लेस्ली रोलिंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह डील अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के ‘मैसिव मार्केट’ में ज्यादा निर्यात करने का मौका देगी। उन्होंने लिखा, “नई यूएस-इंडिया डील से अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स भारत के विशाल बाजार में ज्यादा एक्सपोर्ट होंगे, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में आर्थिक प्रवाह आएगा।”

रोलिंस ने 2024 में अमेरिका के भारत के साथ कृषि व्यापार घाटे का जिक्र किया, जो 1.3 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और यह समझौता इस घाटे को कम करने में मददगार साबित होगा।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में साफ किया कि डील के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को जीरो करेगा। उन्होंने कहा, “भारत कई चीजों पर टैरिफ को जीरो कर रहा है, जैसे ट्री नट्स, वाइन, स्पिरिट्स, फ्रूट्स, वेजिटेबल्स आदि।”  हालांकि, उन्होंने राइस, बीफ, सोयाबीन, शुगर और डेयरी जैसे संवेदनशील उत्पादों का जिक्र नहीं किया, जो भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ अपनी डील से बाहर रखे थे।

अमेरिका किन उत्पादों को भारत में बेचना चाहता है?

अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका भारत में कॉर्न (मक्का), एथनॉल, सोयाबीन, सोयाबीन ऑयल, ट्री नट्स (जैसे बादाम, पिस्ता), सेब, एथाइल अल्कोहल और डेयरी उत्पादों का निर्यात बढ़ाना चाहता है।  2024 में अमेरिका का भारत को कृषि निर्यात 1.6 अरब डॉलर था, जिसमें बादाम (868 मिलियन डॉलर), पिस्ता (121 मिलियन डॉलर) और सेब (21 मिलियन डॉलर) प्रमुख थे।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत का डेयरी सेक्टर अमेरिका के लिए खुला तो घरेलू दूध की कीमत में कम से कम 15% की गिरावट आ सकती। यह रिपोर्ट जुलाई 2025 में आई थी।

US-INDIA ट्रेड डील को किसान नेता व सीपीआई (एम) से पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह कैसे देख रहे हैं। इस सवाल पर उन्‍होंने द लेंस से कहा:

इस डील से भारतीय किसानों का सीधे सीधे नुकसान होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के कृषि उत्‍पाद जो भारत में आएंगे उस पर जीरो टैक्‍स होगा। इससे भारतीय कृषि उत्‍पाद को अपने ही बाजार में बेचना मुश्किल हो जाएगा। कपास का उदाहरण हमारे सामने है। अमेरिका का कपास भारत में आने से यहां के किसानों की कमर टूट चुकी है। यूरोपीय यूनियन से हुई डील से भी भारत के किसानों को नुकसान होगा।  – हन्नान मोल्लाह, पूर्व सांसद

डेयरी सेक्टर पर खतरा, किसानों का विरोध

भारत में इस डील को लेकर चिंताएं चरम पर हैं। किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने इसे ‘अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे समर्पण’ बताया है। एसकेएम ने कहा, “यह डील भारतीय बाजार को अमेरिकी सब्सिडाइज्ड कृषि उत्पादों से भर देगी, जिससे भारतीय किसानों का तबाह हो जाएगा।”  उन्होंने 4 से 11 फरवरी तक गांवों में कैंपेन चलाने और मोदी-ट्रंप का विरोध करने की योजना बनाई है। वहीं पंजाब में किसानों ने भी इस डील का विरोध किया है।

डेयरी सेक्टर पर चिंता सबसे ज्यादा है। भारत में 8 करोड़ से ज्यादा छोटे डेयरी किसान हैं और अमेरिकी डेयरी उत्पाद सब्सिडाइज्ड होने से यहां दूध की कीमतें 15% तक गिर सकती हैं। भारत ने हमेशा डेयरी और जीएम क्रॉप्स को ट्रेड डील्स से बाहर रखा है, क्योंकि अमेरिकी डेयरी में मीट-फेड कैटल और हार्मोन्स का इस्तेमाल होता है, जो भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्य मानकों से मेल नहीं खाता।

विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिकी दबाव में झुक गए और किसानों का ब्लड एंड स्वेट बेच दिया। यह डील किसानों को तबाह कर देगी।”  राहुल ने इसे अदाणी मामले और एपस्टीन फाइल्स से जोड़कर मोदी को ‘compromised’ बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “यह डील कृषि सेक्टर को नष्ट कर देगी।”

केंद्र सरकार क्‍या कह रही है?

भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि डील में कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह प्रोटेक्टेड हैं। उन्होंने कहा, “यह एक प्रो-फार्मर एग्रीमेंट है, जिसमें सेंसिटिव आइटम्स को बाहर रखा गया है। भारत ने कभी किसानों के हितों से समझौता नहीं किया।” 

गोयल ने बताया कि डील से लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल्स, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी को फायदा होगा और 40 अरब डॉलर के भारतीय एक्सपोर्ट्स पर जीरो ड्यूटी लगेगी। हालांकि, अमेरिकी पक्ष के बयानों से विरोधाभास नजर आता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डील से पहले भी अमेरिकी एग्री एक्सपोर्ट्स भारत में रिकॉर्ड हाई पर थे, लेकिन अब और बाजार एक्सेस की उम्मीद है।

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