BJP सांसद की कंपनी के ख़िलाफ़ शुरू हुई CBI जांच तो गडकरी ने बरसाये आशीर्वाद

LENS EXCLUSIVE: यह कहानी देश में सड़क निर्माण परियोजनाओं की आड़ में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों द्वारा किए जा रहे घोटालों की जीती जागती कहानी है। यह कहानी बताती है कि सड़क एवं राजमार्ग परिवहन मंत्रालय द्वारा लिए जाने वाले बेइंतहा टोल टैक्स से असल ज़मीन पर क्या हो रहा है।लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लगातार बारिश के चलते सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मार्ग पर टोल टैक्स स्थगित करने का फैसला लिया है।जिसके बाद देश में सड़क निर्माण की गिरती गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। निश्चित तौर पर इससे राजस्व का भारी घाटा होगा।

NHAI ने रखा हल्का हाथ जबकि भ्रष्टाचार साफ़

NHAI ने साफ किया है कि जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित और दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा।NHAI ने इस एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ कथित तौर पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। 26 जुलाई को सड़क धंसने की घटना के बाद कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एक्सप्रेस वे के प्रभावित हिस्से की मरम्मत करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से की जाएगी. इसका पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक अपने स्तर पर वहन करेगी।NHAI ने स्पष्ट किया है कि इस सुधार कार्य में प्राधिकरण पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा साथ ही कंपनी पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।लेकिन ख़बर यह नहीं है।

रिश्वत खिलाकर निर्माण और सीबीआई का शिकंजा

खबर यह भी नहीं है कि यह कंपनी भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के बड़े भाई प्रदीप जैन की है और इनके अन्य भाई और भतीजे इस कंपनी में प्रबंध निदेशक और अन्य पदों पर हैं।खबर यह है कि इनके एक भाई योगेश जैन जो कि कंपनी प्रबंध निदेशक हैं सीबीआई द्वारा NHAI के अधिकारियों को घूस देने के मामले में नामजद हैं,

सीबीआई ने जून 2014 में NHAI छतरपुर मध्यप्रदेश के महाप्रबंधक और परियोजना निदेशक पुरुषोत्तम लाल चौधरी को दस लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों समेत 10 संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। खजुराहो झांसी राजमार्ग के निर्माण में रिश्वतखोरी के मामले में चौधरी समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिसमें कंपनी पीएनसी इंफ्रा लिमिटेड के कर्मचारी सत्य नारायण अंगुलुरी, बृजेश मिश्रा, अनिल जैन और शुभम जैन शामिल थे। आरोप था कि कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को अनुचित लाभ लाभ पहुंचाने के लिए एनएचएआई अधिकारियों ने रिश्वत की डिमांड की जिस पर कंपनी ने एनएचआई के अधिकारियों को रिश्वत दी। सीबीआई को जानकारी मिली थी कि एनएचएआई की ओर से पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को दिए गए झांसी-खजुराहो प्रोजेक्ट के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने और अंतिम बिल की प्रोसेसिंग के साथ साथ अंतिम हैंडओवर प्राप्त करने के के लिए कथित तौर पर रिश्वत की डिमांड की जा रही है।

लखनऊ आगरा मार्ग में भी किया था भ्रष्टाचार

लेकिन यह भ्रष्टाचार की इस अकथ कहानी का एक हिस्सा था । इसके पहले 2022 में सड़क एवं राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को लखनऊ कानपुर राजमार्ग के निर्माण का ठेका दे दिया था। जबकि कंपनी लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे के निर्माण में गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में थी दरअसल आगरा लखनऊ एक्स्प्रेस वे का निर्माण सपा सरकार ने कराया था. राज्य सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के एक हिस्से के जल्द पूरा होने करने की जिम्मेदारी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को दी थी तब आगरा के भाजपा के मेयर रहे नवीन जैन के भाई की स्वामित्व वाली इस कंपनी ने आगरा से फिरोजाबाद तक एक्सप्रेसवे के 56 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया था. मगर, एक्सप्रेस वे का एक हिस्सा छह महीने के भीतर ही ढह गया था। जबकि, सरकार ने तब 58 करोड़ रुपये का बोनस भी कंपनी को दिया था। सिर्फ़ इतना ही नहीं केव इन की एक घटना में वाहन ही गड्ढे में गिर गया. झाँसी खजुराहों मार्ग के निर्माण के दौरान कंपनी पर 104 करोड़ का जुर्माना लगा दिया गया।

गडकरी के प्रेम की अनंत कहानी

अब आते हैं असल कहानी पर। गडकरी के कार्यकाल में भाजपा सांसद के परिवार की यह कंपनी लगातार सड़क मंत्रालय की आँखों का तारा बनी हुई है।कंपनी को पिछले दस वर्षों में तक़रीबन 50 हज़ार करोड़ के सैकड़ों ठेके दिए गए। एक तरफ़ पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के कामन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे थे दूसरी तरह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 2021 में इसे प्रतिष्ठित ‘अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस’ से सम्मानित कर दिया गया। नितिन गडकरी और लोकसभा अध्यक्ष के हाथों योगेश जैन ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। इस पुरस्कार के बाद लखनऊ कानपुर सड़क निर्माण का कार्य इन्हें सौंप दिया गया. जबकि यह लखनऊ आगरा हाईवे के निर्माण की ख़राब क्वालिटी को लेकर लगातार सुर्खियों में थी।भाजपा सांसद की कंपनी होने का फायदा यह हुआ कि इन्हें देश के अलग अलग भाजपशासित राज्यों में जमकर ठेके मिलने लगे।

छत्तीसगढ़ में 2025 में इन्हें गेवरा खदान का 2,957 करोड़ रुपये का खनन अनुबंध मिल गया जिसके बाद कंपनी को पंख लग गए। अब करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 24 दिन बाद सड़क 84 स्थानों पर धंसने का मामला सामने आया। इसी बीच इन्होंने आगरा में एक फाइव स्टार होटल भी खरीद लिया जो पूरी तरह शाकाहारी है।

पीएनसी को मिले पिछले 10 वर्षों के प्रमुख बड़े ठेके

यहाँ कंपनी को मिले कुछ महत्वपूर्ण और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स की सूची है

2016–2017:
रायबरेली-जौनपुर हाईवे (BOT-Annuity, 166 किमी) आगरा बायपास (NH-2/NH-3) और धौलपुर-मुरैना (NH-3) फोर-लेनिंग।
नागिना-काशीपुर (NH-74) और वाराणसी-गोरखपुर (NH-29) EPC प्रोजेक्ट (कुल ≈₹2,024 करोड़)।
4 HAM हाईवे प्रोजेक्ट्स (कुल Bid Project Cost ≈₹5,035 करोड़)

2022–2023:
NHAI से 7 नए HAM प्रोजेक्ट्स (कुल ≈₹8,446 करोड़)।
3 अतिरिक्त HAM प्रोजेक्ट्स (कुल ≈₹4,083 करोड़)।
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरपोरेशन से रेलवे प्रोजेक्ट (≈₹771 करोड़)।
उत्तर प्रदेश में जल आपूर्ति (Jal Jeevan) EPC प्रोजेक्ट्स।



2024:
MSRDC से 2 बड़े EPC रोड प्रोजेक्ट्स (पुणे रिंग रोड Package E2 + जलना-नांदेड एक्सप्रेसवे Package 4) – कुल ≈₹4,630 करोड़।
CIDCO (NAINA प्रोजेक्ट) से इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (रोड्स, फ्लाईओवर आदि) – ≈₹2,040 करोड़ (JV में)।
अन्य HAM/EPC प्रोजेक्ट्स।

2025–2026:
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे (NE-6, ≈₹4,700 करोड़, HAM मॉडल, 63 किमी) – कंपनी की प्रमुख परियोजना (हाल में धंसने की घटनाओं के बाद विवादित)।
NHAI से NH-927 पर 2 HAM प्रोजेक्ट्स (बराबंकी-मुस्तफाबाद + मुस्तफाबाद-बिसवरिया) – कुल ₹3,483 करोड़ (जुलाई 2026 में कन्सेशन एग्रीमेंट)।
SECL से कोल माइनिंग (OB Removal & Coal Extraction) – ≈₹2,957 करोड़।
पश्चिमी भोपाल बायपास (HAM, ≈₹1,091 करोड़)।
वाराणसी-रांची-कोलकाता हाईवे पैकेजेस।
पंतनगर एयरपोर्ट EPC (AAI) – ≈₹302 करोड़।
लखनऊ शहीद पथ फ्लाईओवर (≈₹194 करोड़)।
गंगा नदी ब्रिज (कानपुर, JV) आदि।

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