नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेट (US Senate) ने 86-11 वोट से रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 पास कर दिया। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के शीर्ष पांच खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, जिनमें वर्तमान में भारत और चीन शामिल हैं। हालांकि बिल संभावित व्यापार जोखिम पैदा करता है, लेकिन अंतिम आर्थिक प्रभाव राष्ट्रपति की छूट शक्तियों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
इस बिल का पूरा नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है, जिसे भारी बहुमत 86-11 वोट से पास कर दिया। यह कानून प्रमुख खरीदारों पर दंडात्मक आयात टैरिफ लगाकर रूसी ऊर्जा राजस्व को कम करने का प्रयास करता है।
क्या क्या हुआ?
- अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध पैकेज को 86-11 द्विदलीय वोट से पास किया।
- बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के शीर्ष पांच आयातकों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
- 7 फरवरी 2026 को अमेरिका ने रूसी तेल आयात से जुड़े कुछ भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त 25 फीसदी एड वैलोरम टैरिफ हटा दिया था।
- प्रस्तावित अधिकतम टैरिफ को बिल के पहले संस्करणों में शामिल 500 फीसदी के बजाय घटाकर 100 फीसदी तक कर दिया गया।
मुख्य बातें
- व्यापक प्रतिबंध: बिल रूसी अधिकारियों, ओलिगार्क्स, शैडो-फ्लीट जहाजों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाता है।
- टैरिफ अधिकार: यह अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का विवेकाधीन अधिकार देता है।
- प्रभावित शीर्ष खरीदार:
चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान टैरिफ प्रावधानों के मुख्य निशाने पर हैं। - विवेकाधीन छूट: बिल में राष्ट्रीय हित छूट प्रावधान शामिल हैं, जो जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति को टैरिफ से बचने की अनुमति देते हैं। सीनेट द्वारा बिल पास होना बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और रूसी ऊर्जा खरीदने वाली संस्थाओं पर सख्त रुख का संकेत देता है। हालांकि, चूंकि कानून राष्ट्रपति को विवेकाधीन अधिकार देता है और व्यापक राष्ट्रीय हित छूट प्रावधान शामिल हैं, इसलिए व्यापार संघर्ष का तत्काल खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा, बिल को अभी अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से भी पास होना है, जहां इसमें देरी और बहस हो सकती है।
बाजार पर प्रभाव
यह विकास भारतीय ऊर्जा आयात और व्यापक व्यापार संबंधों के लिए मध्यम अनिश्चितता पैदा कर सकता है। हालांकि, पहले के व्यापार समझौतों और पिछले अमेरिकी एड वैलोरम टैरिफ हटाने को देखते हुए निकट भविष्य में बड़ा व्यापार व्यवधान असंभव लगता है। शेयर बाजार और भारतीय तेल कंपनियां अमेरिकी कांग्रेस में बिल की प्रगति पर नजर रखेंगी।न्यूट्रल बिल पास होने से दीर्घकालिक भू-राजनीतिक निगरानी बिंदु बनता है, लेकिन विवेकाधीन छूट धाराओं और हाउस मंजूरी की जरूरत के कारण तत्काल बाजार प्रभाव कम है।
आगे क्या होना है?
- अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बिल पर वोटिंग और प्रगति
- भारतीय विदेश मंत्रालय और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय चर्चा
सबसे बड़ा तेल आयातक भारत
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, और रूसी तेल इसके आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मई 2026 में रूसी तेल भारत के कुल तेल आयात का 40% से अधिक था। प्रस्तावित प्रतिबंध प्रमुख खरीदारों पर मॉस्को पर निर्भरता कम करने का दबाव डालते हैं, जिससे अगर 100% तक टैरिफ सक्रिय रूप से लगाए गए तो आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम पैदा हो सकता है।
ध्यान देने योग्य प्रमुख बातें
- बढ़ते टैरिफ खतरे: ऊर्जा आयात कम न करने पर भारतीय सामानों पर 100% तक टैरिफ लागू होने की संभावना।
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की मंजूरी: अगर अमेरिकी हाउस पास कर दे और राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर दें तो बिल कानून बन सकता है।
- द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े तनाव : चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक और वाणिज्यिक संबंधों में तनाव।











