नई दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने आज तमिलनाडु विधानसभा में कहा कि सनातन धर्म विभाजनकारी है, इसे खत्म किया जाना चाहिए। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को सदन में सनातन धर्म को ‘समाप्त’ करने का आह्वान किया और दावा किया कि यह लोगों को विभाजित करता है। इसके पहले उन्होंने सितंबर 2023 में भी यही बात कही थी।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में अपने पहले भाषण में, डीएमके नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष तमिल प्रार्थना गीत “तमिल थाई वझुथु” को हाशिए पर धकेलने के किसी भी प्रयास को “बर्दाश्त नहीं करेगा”।
सदन में अपने भाषण में उन्होंने कहा, “सनातन धर्म, जो लोगों को विभाजित करता है, उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।” 2023 में उनके इसी तरह के बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके चलते उन्हें हिंदू संगठनों की आलोचना और अदालती मुकदमों का सामना करना पड़ा था।
उदयनिधि ने हाल ही में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के संबंध में एक विशेष शिकायत उठाई, जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान को उसकी पारंपरिक प्राथमिकता के बजाय तीसरे स्थान पर रखा गया था। नेता ने कहा कि आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुई यह घटना एक गलती थी, और आपको विधानसभा में इसे दोबारा होने नहीं देना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि न केवल विधानसभा में, बल्कि तमिलनाडु में आयोजित किसी भी सरकारी कार्यक्रम या किसी भी अन्य कार्यक्रम में ‘तमिल थाई वझथु’ को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया जाना चाहिए। उदयनिधि कहा, “मैं इस सरकार से अनुरोध करता हूं कि यह सुनिश्चित करें कि इसमें कभी कोई समझौता न हो। हमें अपने अधिकारों और परंपराओं की रक्षा के लिए बहुत सतर्क रहना चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि शपथ ग्रहण में जो हुआ उससे राज्य की जनता में काफी आक्रोश और आक्रोश फैल गया है।










